श्रीडूंगरगढ़, 31 अक्टूबर 2025। श्री गणेशाय नमः।
आज कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है, जो सुबह 10 बजकर 05 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों में तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने का वर्णन है।
आज का नक्षत्र धनिष्ठा है, जो शाम 06 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। कहा जाता है कि नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है।
आज कौलव और तैतिल करण हैं, तथा शुक्ल पक्ष चल रहा है। वृद्धि योग सुबह 04 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और उनसे वियोग नहीं होता है।
आज शुक्रवार है, और वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है। करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए।
सूर्य का उदय सुबह 06 बजकर 44 मिनट पर हुआ, और सूर्यास्त शाम 05 बजकर 50 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 02 बजकर 28 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन सुबह 01 बजकर 56 मिनट पर होगा। चंद्र राशि कुंभ है, जो शाम 06 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। चन्द्र वास पश्चिम दिशा में है। वर्तमान में हेमंत ऋतु चल रही है।
शक सम्वत 1947 विश्वावसु है, जबकि विक्रम सम्वत 2082 है। काली सम्वत 5126 है। मास अमांत और पूर्णिमांत दोनों ही कार्तिक हैं। दिन काल 11 घंटे 06 मिनट और 30 सेकंड का है।
आज का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।
दुष्टमुहूर्त सुबह 08 बजकर 57 मिनट से 09 बजकर 41 मिनट तक, और कंटक मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 24 मिनट से 02 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। यमघण्ट 04 बजकर 21 मिनट से 05 बजकर 06 मिनट तक रहेगा। राहु काल 10 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। कुलिक 08 बजकर 57 मिनट से 09 बजकर 41 मिनट तक, कालवेला / अर्द्धयाम 02 बजकर 52 मिनट से 03 बजकर 37 मिनट तक, यमगण्ड 03 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 27 मिनट तक और गुलिक काल 08 बजकर 07 मिनट से 09 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
दिशा शूल पश्चिम दिशा में है।
ताराबल भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों के लिए शुभ है।
चंद्रबल मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर और मीन राशियों के लिए शुभ है।
आज आँवला नवमी है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के नाम से जाना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE के अनुसार, आंवले के वृक्ष में बेल (भगवान शंकर जी) और तुलसी (भगवान श्री विष्णु जी) दोनों का गुण एक साथ होते हैं। इसलिए यदि कोई आंवले के पेड़ की पूजा करता है तो वह भगवान शिव और भगवान विष्णु जी दोनों की पूजा एक साथ कर लेता है।
आज शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करने से मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न होती हैं। शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें । शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
।। आज का दिन मंगलमय हो।।