आज अष्टमी तिथि है, जो सायं 06:07 बजे तक रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। शास्त्रों में तिथि के श्रवण और पठन को माँ लक्ष्मी की कृपा का कारक माना गया है। नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा है, जो पूरी रात्रि रहेगा।
पंचांग के अनुसार, वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है, नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है, योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है और उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए, जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।
आज सूर्योदय सुबह 06:25 बजे हुआ और सूर्यास्त सायं 06:21 बजे होगा। चन्द्रोदय दोपहर 01:54 बजे होगा और चन्द्रास्त 00:06 बजे होगा। ऋतु शरद है।
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा। वहीं, राहु काल दोपहर 03:22 बजे से 04:52 बजे तक रहेगा। दिशा शूल उत्तर दिशा में रहेगा।
आज नवरात्रि का नौवां दिन है, जो माँ सिद्धिदात्री को समर्पित है। मान्यता है कि माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं और उनकी उपासना करने वाले साधक को सभी सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं।
आज दुर्गाष्टमी भी है। इस दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। अष्टमी तिथि को माँ गौरी को दूध से बने नैवेद्य एवं नारियल का भोग लगाने का विधान है। जिनके घरों में अष्टमी पूजी जाती है और जो सात नवरात्री का व्रत रखते हैं, उनके यहां अष्टमी की पूजा के बाद नन्ही कुंवारी कन्याओं को भोजन कराना शुभ फल देने वाला माना जाता है। अष्टमी के दिन नन्ही कन्याओं, जिन्हें कंजक कहा जाता है, की पूजा करना, उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन करवाकर उन्हें उपहार देने से माँ दुर्गा की असीम कृपा मिलती है।
विशेष: नौ दिवस व्रत करने वाले कल व्रत को पूर्ण करें!
पंडित श्रीडूंगरगढ़ ONE ने यह जानकारी दी है।