शास्त्रों में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के महत्व को विस्तार से बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इनका श्रवण और पठन माँ लक्ष्मी की कृपा, आयु में वृद्धि, पापों का नाश, प्रियजनों के साथ प्रेम और मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक होता है।
आज, विक्रम सम्वत 2082 में, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। नक्षत्र भरणी है और योग परिघ है। सूर्योदय प्रात: 07:09 बजे हुआ और सूर्यास्त सायं 05:37 बजे होगा। ऋतु हेमंत है, जो प्रकृति में शीतलता का संकेत दे रही है।
दिन के शुभ और अशुभ समयों को भी पंचांग में दर्शाया गया है, जिसमें राहु काल और यमगण्ड जैसे समय शामिल हैं। दिशा शूल उत्तर दिशा में है।
चंद्रबल और ताराबल की गणना भी दी गई है, जो विभिन्न राशियों के लिए अनुकूल और प्रतिकूल स्थितियों को दर्शाती है।
आज के चोघड़िया मुहूर्त भी दिए गए हैं, जो दिन के विभिन्न कार्यों के लिए शुभ समय बताते हैं।
लग्न तालिका वृश्चिक से शुरू होकर तुला पर समाप्त हो रही है, जो विभिन्न समयों पर विभिन्न लग्न की स्थितियों को दर्शाती है।
पंचांग के अंत में, बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा का महत्व बताया गया है। यह भी उल्लेख किया गया है कि बुध देव की आराधना से ज्ञान, वाकपटुता और धन की प्राप्ति होती है।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE के अनुसार, यह पंचांग न केवल एक दैनिक मार्गदर्शिका है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और ज्योतिष के ज्ञान का भी प्रतीक है।