श्रीडूंगरगढ़, 16 अक्टूबर, 2025। न्याय की देवी ने आखिर तीन साल पुराने एक हत्याकांड में अपना फैसला सुना दिया। अपर सेशन न्यायाधीश सरिता नौशाद की अदालत ने सोमवार को आरोपी लालाराम उर्फ लालचंद को उसके कुकर्मों की सज़ा सुनाई। लालाराम को आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये का अर्थदंड भरने का आदेश दिया गया है। लालाराम, जो सुरजनसर का रहने वाला है, पर अपने ही गांव के नानूराम की हत्या का आरोप था।
यह मामला 11 अक्टूबर 2022 का है, जब परिवादी भोजाराम ने श्रीडूंगरगढ़ थाने में अपने भाई नानूराम की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसकी रिपोर्ट के अनुसार, लालाराम ने उसके भाई का खून किया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी और आरोपी लालाराम को दोषी मानते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने अदालत में इस मामले को मजबूती से रखा। उन्होंने 14 गवाहों की गवाही और 33 दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया, जो लालाराम को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त थे। अभियोजक सिद्ध ने अदालत से यह भी आग्रह किया कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुना और सभी साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया। इसके बाद न्यायाधीश सरिता नौशाद ने आरोपी लालाराम को हत्या का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास के साथ-साथ 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश सरिता नौशाद ने कहा, “हत्या एक अत्यंत गंभीर अपराध है, जो समाज की अंतरात्मा को झकझोर देता है। अभियुक्त द्वारा किया गया यह कृत्य सामाजिक और मानवीय मूल्यों के विपरीत है। यदि ऐसे अपराधियों को सजा नहीं दी जाती है, तो दूसरों के हौसले बुलंद होंगे और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठेंगे।”
यह फैसला न केवल मृतक नानूराम के परिवार को न्याय दिलाता है, बल्कि यह समाज को भी एक संदेश देता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और कोई भी अपराधी बच नहीं सकता। यह फैसला न्यायपालिका की निष्पक्षता और संवेदनशीलता का भी प्रमाण है।