शास्त्रों में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के महत्व का बखान किया गया है। मान्यता है कि इनके श्रवण और पठन से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है, आयु में वृद्धि होती है, पापों का नाश होता है, प्रियजनों का प्रेम बना रहता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि सनातन परम्परा में नित्य पंचांग देखने और पढ़ने का महत्व बताया गया है।
आज, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो दोपहर 3 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। नक्षत्र चित्रा है, जो पूरे दिन और रात विद्यमान रहेगा। शुभ योग दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक है।
पंचांग के अनुसार, आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 09 मिनट पर हुआ, जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 01 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर और चंद्रास्त रात 9 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऋतु शरद है और चन्द्र राशि कन्या है जो शाम 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगी।
आज के शुभ और अशुभ समय की बात करें तो, राहु काल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। दिशा शूल उत्तर दिशा में है।
आज भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों का ताराबल उत्तम है। वहीं, मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशियों के लिए चन्द्रबल अनुकूल है।
बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके और लड्डुओं का भोग लगाकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही, बुध देव की आराधना करने से ज्ञान, वाकपटुता और धन लाभ होता है।
गणेश चतुर्थी का पर्व भी आने वाला है, जो हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। इस दिन भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें दूर्वा और मोदक का भोग लगाया जाता है। कई जगहों पर भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाती है, जिसका नौ दिनों तक पूजन किया जाता है। फिर, गाजे-बाजे के साथ प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाता है।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री के अनुसार, आज का दिन मंगलमय हो।