श्रीडूंगरगढ़, 26 अक्टूबर 2025। आज, श्री गणेश के आशीर्वाद से दिन का आरम्भ करते हुए, पंचांग का महत्व समझते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि तिथि के श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है, वार के श्रवण से आयु बढ़ती है, नक्षत्र सुनने से पापों का नाश होता है, योग के श्रवण से प्रियजनों का प्रेम बना रहता है और करण के श्रवण से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि नित्य पंचांग का अवलोकन शुभ फलदायी माना गया है।
आज का पंचांग इस प्रकार है:
* तिथि: पंचमी (प्रातः 06:06 तक)
* नक्षत्र: ज्येष्ठा (प्रातः 10:47 तक)
* करण: बव, बालव (सायं 05:00 तक)
* पक्ष: शुक्ल
* योग: शोभन (प्रातः 06:45 तक)
* वार: रविवार
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति की बात करें तो, सूर्योदय प्रातः 06:40 पर हुआ और सूर्यास्त सायं 05:54 पर होगा। चंद्रोदय प्रातः 10:56 पर होगा और चंद्रास्त रात्रि 09:02 पर होगा। ऋतु हेमंत है।
पंचांग में शुभ और अशुभ समय का भी विवरण दिया गया है। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:55 से 12:40 तक रहेगा। राहु काल सायं 04:30 से 05:54 तक रहेगा। दिशा शूल पश्चिम दिशा में रहेगा।
आज लाभ पंचमी भी है। यह पर्व दीपावली के अंतिम पर्व के रूप में भारतवर्ष में मनाया जाता है। इसे कहीं लाभ पंचमी, कहीं सौभाग्य पंचमी, तो कहीं ज्ञान पंचमी भी कहते हैं। माँ लक्ष्मी को यह पर्व अत्यंत प्रिय है और इस दिन उनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
विशेष रूप से गुजरात और महाराष्ट्र में लाभ पंचमी को बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। गुजरात में यह मान्यता है कि इस दिन पूजा करने, नए व्यापार शुरू करने और नए सौदे करने से भाग्य खुलता है। गुजराती नववर्ष दिवाली के अगले दिन से शुरू होता है, और लोग चार दिनों की छुट्टी के बाद लाभ पंचमी से अपना काम फिर से शुरू करते हैं।
आज के दिन गुजरात में व्यापारी अपने नए बहीखाते बनाते हैं। इन बहीखातों के बाईं ओर ‘शुभ’ और दाईं ओर ‘लाभ’ लिखा जाता है, और पहले पृष्ठ के बीच में स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। भगवान शंकर-पार्वती और लक्ष्मी-गणेश की पूजा भी आज के दिन विशेष फलदायी मानी जाती है। गणपति जी की पूजा शमी पत्र और दूर्वा चढ़ाकर करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
रविवार के दिन सूर्य पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन उगते हुए सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्घ्य देना चाहिए। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना और यथासंभव मीठा भोजन करना भी शुभ माना जाता है। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, और सूर्य देव को जल देने से पितरों की कृपा भी मिलती है।
इसके अतिरिक्त, रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन और आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते हैं तथा साहस और बल की प्राप्ति होती है। मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें और उनके मंत्र “ॐ काल भैरवाय नमः” या “ॐ श्री भैरवाय नमः” की एक माला जाप करने से रोग, अकाल मृत्यु से बचाव होता है और मनवांछित लाभ मिलता है।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE की ओर से आप सभी को लाभ पंचमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!