प्रातः काल, पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि थी और नक्षत्र अनुराधा था। तैतिल और गर करण थे, और शुक्ल पक्ष का समय था। सौभाग्य योग ने दिन में विशेष महत्व जोड़ा।
पंचांग में बताया गया है कि तिथि के श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, वार के श्रवण से आयु बढ़ती है, नक्षत्र के श्रवण से पापों का नाश होता है, योग के श्रवण से प्रियजनों का प्रेम बना रहता है, और करण के श्रवण से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
आज सूर्योदय 6:39 AM पर हुआ और सूर्यास्त 5:56 PM पर होगा। चंद्रोदय 9:05 AM पर होगा और चंद्रास्त 7:26 PM पर होगा। ऋतु हेमंत है, जो शीतकाल के आगमन का संकेत है।
विक्रम सम्वत 2082 है, और मास कार्तिक है। पंचांग में शुभ और अशुभ समयों का भी विवरण दिया गया है, जिसमें अभिजीत मुहूर्त, दुष्टमुहूर्त, राहु काल, और गुलिक काल शामिल हैं। दिशा शूल पश्चिम है, इसलिए इस दिशा में यात्रा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
आज के ताराबल के अनुसार अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, और रेवती नक्षत्र शुभ हैं। चन्द्रबल वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक और मकर राशि के लिए अनुकूल है।
दिन के चोघड़िया भी बताए गए हैं, जो विभिन्न कार्यों के लिए शुभ और अशुभ समयों का निर्धारण करते हैं। लग्न तालिका भी दी गई है, जो ज्योतिषीय गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE ने बताया कि शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाने और उन्हें पीले चंदन का तिलक लगाने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस दिन श्री सूक्त, महालक्ष्मी अष्टकम, और माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नामों का पाठ करने से धन लाभ और संकटों से मुक्ति मिलती है। माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। शुक्रवार को शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में सुख, ऐश्वर्य, और दाम्पत्य जीवन में सुख मिलता है।
इस प्रकार, आज का दिन पंचांग के मार्गदर्शन में शुभ कार्यों और आराधना के लिए समर्पित है।