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22 नवंबर 2025 का पंचांग, साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य श्रीडूंगरगढ़ ONE के साथ।

शास्त्र कहते हैं कि तिथि का श्रवण माँ लक्ष्मी की कृपा का पात्र बनाता है, वार सुनने से आयु बढ़ती है, नक्षत्र सुनने से पापों का नाश होता है, योग सुनने से प्रियजनों का प्रेम अटूट रहता है, और करण के श्रवण से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के साथ, आइए आज के पंचांग पर एक दृष्टि डालें।

आज मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, जो शाम 05:13 तक रहेगी। आकाश में ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव शाम 04:47 तक रहेगा। कौलव और तैतिल करण दिन के अलग-अलग समयों में रहेंगे। योग सुकर्मा सुबह 11:29 तक रहेगा, जिसके बाद दिन शुभ कार्यों के लिए अनुकूल रहेगा।

सूर्य आज सुबह 07:00 बजे उदय हुए और शाम 05:39 बजे अस्त होंगे। चंद्रमा वृश्चिक राशि में हैं और सुबह 08:50 बजे उदय होंगे, जो शाम 06:57 बजे अस्त हो जाएंगे। ऋतु हेमंत है, जो प्रकृति में शीतलता और स्थिरता का संचार कर रही है।

दिन का शुभ समय अभिजीत मुहूर्त 11:58 AM से 12:41 PM तक रहेगा। वहीं, अशुभ समय में दुष्टमुहूर्त, कंटक, यमघण्ट, राहु काल, कुलिक, कालवेला/अर्द्धयाम और यमगण्ड शामिल हैं, जिनमें कार्यों को सावधानीपूर्वक करने की सलाह दी जाती है।

दिशा शूल पूर्व दिशा में है, इसलिए इस दिशा में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतें।

ताराबल अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती नक्षत्रों के लिए अनुकूल है। चन्द्रबल वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर राशियों के लिए शुभ है।

दिन के विभिन्न कार्यों के लिए चोघड़िया इस प्रकार रहेंगे:

* काल: 07:01 AM – 08:20 AM
* शुभ: 08:20 AM – 09:40 AM
* रोग: 09:40 AM – 11:00 AM
* उद्वेग: 11:00 AM – 12:20 PM
* चल: 12:20 PM – 01:39 PM
* लाभ: 01:39 PM – 02:59 PM
* अमृत: 02:59 PM – 04:19 PM
* काल: 04:19 PM – 05:39 PM

विभिन्न लग्नों का समय इस प्रकार है:

* वृश्चिक: 06:37 AM – 08:56 AM
* धनु: 08:56 AM – 11:00 AM
* मकर: 11:00 AM – 12:43 PM
* कुम्भ: 12:43 PM – 02:11 PM
* मीन: 02:11 PM – 03:37 PM
* मेष: 03:37 PM – 05:13 PM
* वृषभ: 05:13 PM – 07:09 PM
* मिथुन: 07:09 PM – 09:24 PM
* कर्क: 09:24 PM – 11:44 PM
* सिंह: 11:44 PM – 02:01 AM
* कन्या: 02:01 AM – 04:17 AM
* तुला: 04:17 AM – 06:37 AM

शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। प्रात:काल पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित जल चढ़ाने और सायंकाल तेल का दीपक जलाने से कुंडली की ग्रह बाधाएं दूर होती हैं। हनुमान चालीसा का पाठ और गायत्री मंत्र का जाप भय को दूर करता है और बिगड़े हुए कार्यों को बनाता है।

शिवपुराण के अनुसार, शनि देव पिप्पलाद ऋषि का स्मरण करने वालों को पीड़ा नहीं देते। इसलिए, जिन लोगों पर शनि की दशा चल रही है, उन्हें पिप्पलाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। उनके तीन नामों – पिप्पलाद, गाधि, कौशिक – का जाप करने से शनि देव की कृपा मिलती है।

पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE की ओर से आज का दिन मंगलमय हो।

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