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21 अगस्त के पंचांग के साथ पढें और भी कई खास बातें के साथ..

श्रीडूंगरगढ़, 21 अगस्त 2025। आज का दिन श्री गणेश को समर्पित करते हुए, पंचांग के अनुसार आज त्रयोदशी तिथि है जो दोपहर 12:46 तक रहेगी। मान्यता है कि तिथि के श्रवण और पठन से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। नक्षत्र की बात करें तो, पुष्य नक्षत्र पूरे दिन रहेगा। शास्त्रों में नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होना बताया गया है।

पंचांग के अनुसार, आज का करण वणिज और विष्टि है, जबकि योग व्यतीपात है जो दोपहर 04:14 तक रहेगा। वार गुरुवार है, जिसे बृहस्पति देव का दिन माना जाता है।

सूर्य और चन्द्र की स्थिति पर ध्यान दें तो, सूर्योदय सुबह 06:06 बजे हुआ और सूर्यास्त शाम 07:07 बजे होगा। चन्द्रोदय कल सुबह 04:55 बजे होगा और चन्द्रास्त शाम 06:04 बजे होगा। चन्द्र राशि कर्क है और चन्द्र वास उत्तर दिशा में रहेगा। वर्तमान में वर्षा ऋतु चल रही है।

हिन्दू मास एवं वर्ष की बात करें तो, शक सम्वत 1947 विश्वावसु है, काली सम्वत 5126 है और विक्रम सम्वत 2082 है। मास अमांत श्रावण और मास पूर्णिमांत भाद्रपद है।

आज के शुभ और अशुभ समय की जानकारी भी पंचांग में दी गई है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 से 01:02 तक रहेगा। वहीं, दुष्टमुहूर्त, कंटक, यमघण्ट, राहु काल, कुलिक, कालवेला/अर्द्धयाम और यमगण्ड जैसे अशुभ समय भी दिए गए हैं, जिनमें शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। दिशा शूल दक्षिण दिशा में है।

ताराबल की बात करें तो, अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा आदि नक्षत्र शुभ हैं। चन्द्रबल वृषभ, कर्क, कन्या, तुला आदि राशियों के लिए अनुकूल है।

दिन के विभिन्न समयों के लिए चोघडिया भी दिए गए हैं, जिनमें शुभ, रोग, उद्वेग, चल, लाभ, अमृत और काल जैसे मुहूर्त शामिल हैं।

पंचांग के अंत में लग्न तालिका भी दी गई है, जिसमें विभिन्न लग्नों के उदय और अस्त होने का समय बताया गया है।

पंडित अनुसार, गुरुवार को कुछ कार्यों को करने से लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं, जैसे कि सर धोना, शरीर में साबुन लगाकर नहाना और कपड़े धोना। उन्होंने गुरुवार को बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए चने की दाल, हल्दी और गुड़ को केले के पेड़ पर चढ़ाने और दीपक जलाने की सलाह दी है। साथ ही, महिलाओं को हल्दी वाला उबटन लगाने और कुंवारी लड़कियों को योग्य जीवन साथी प्राप्त करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं। गुरुवार को विष्णु जी की उपासना और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी फलदाई माना गया है।

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