श्रीडूंगरगढ़, 20 अक्टूबर 2025: श्रीडूंगरगढ़ में आज दीपावली का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, आज कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी है, और शास्त्रों में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के श्रवण एवं पठन को शुभ फलदायी माना गया है।
आज का पंचांग बताता है कि तिथि चतुर्दशी दोपहर 3:46 तक रहेगी, नक्षत्र हस्त रात्रि 8:17 तक है, और योग वैधृति प्रात: 2:34 तक। सूर्योदय 6:37 बजे हुआ और सूर्यास्त 6:00 बजे होगा। ऋतु शरद है और विक्रम संवत 2082 चल रहा है।
दीपावली, जो कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है, उस दिन को स्मरण कराती है जब भगवान राम, रावण का वध करके सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया, और तभी से यह पर्व प्रकाश और खुशियों का प्रतीक बन गया।
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि आज दोपहर 3:46 से शुरू होकर कल शाम 5:55 तक रहेगी। चूंकि प्रदोष काल में अमावस्या आज है, इसलिए दीपावली आज ही मनाई जाएगी।
ज्योतिषियों के अनुसार, दीपावली पूजन के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
* **गृहस्थ, किसान, व्यापारी, विद्यार्थी वर्ग (सभी के लिए):** प्रदोष काल सायं 6:01 से 8:32 तक, वृषभ लग्न सायं 7:27 से 9:23 तक (सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त)।
* **नौकरीपेशा के लिए:** लाभ दोपहर 3:11 से 4:36 तक।
* **विद्यार्थियों के लिए:** अमृत सायं 4:37 से 6:01 तक।
* **व्यापारियों के लिए:** चंचल सायं 6:02 से 7:36 तक।
* **साधकों के लिए:** लाभ रात्रि 10:47 से 12:22 तक, शुभ (सिंह लग्न भी) रात्रि 1:56 से 4:14 तक, अमृत रात्रि 3:32 से 5:07 तक (इसमें ब्रह्म मुहूर्त भी)।
दीपावली की पूजा में घर के मंदिर या धन स्थान में रखे यंत्रों की पूजा माँ लक्ष्मी के सामने करनी चाहिए। कमल गट्टा, पीली सरसों, शहद, साबुत धनिया, पीली कौडिय़ां, गोमती चक्र, नाग केसर, साबुत हल्दी की गांठ, कमल का फूल आदि का प्रयोग करें।
गणेश जी और लक्ष्मी जी को पंचामृत से स्नान करवाकर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर चावल का अष्टदल या स्वस्तिक बनाकर प्रतिमा स्थापित करें। दक्षिणवर्ती शंख को अक्षत डालकर स्थापित करें, और दूर्वा, तुलसी एवं पुष्प की पंखुड़ी डालकर जल भरें। किसी कटोरी में पान के पत्ते पर नैवेद्य (प्रसाद) रखें और लौंग का जोड़ा या इलायची रखकर माँ लक्ष्मी और गणेश जी को अर्पित करें।
पूजन के समय माँ लक्ष्मी के सामने अपनी तिजोरी से सोने-चाँदी के सिक्के या आभूषण निकालकर पूजन करें।
शाम को दीवाली के पूजन से पहले किसी गरीब सुहागिन स्त्री को अपनी पत्नी के द्वारा सुहाग सामग्री अवश्य दिलवाएं, जिसमें इत्र अवश्य हो।
सांयकाल लक्ष्मी पूजन के मुहूर्त के समय गृहस्वामी को अपने परिवार के साथ स्नान करके पीले वस्त्र धारण करके पूजा के कमरे में प्रवेश करना चाहिए। प्रवेश करते समय माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर जी, इंद्र जी, माता सरस्वती का ध्यान करना चाहिए और तीन बार ताली बजानी चाहिए।
श्रीडूंगरगढ़ के पंडितों का कहना है कि दीपावली का यह पर्व सुख-समृद्धि और शांति लेकर आए।