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2 अप्रैल 2026 का पंचांग, साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य श्रीडूंगरगढ़ ONE के साथ।

श्रीडूंगरगढ़ श्रीडूंगरगढ़ ONE 2 अप्रैल 2026। पढें आज का पंचांग।

श्री गणेशाय नम:

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

आज का पंचांग

02 – Apr – 2026
Sri Dungargarh, India

पंचांग
तिथि पूर्णिमा 07:44 AM
नक्षत्र हस्त 05:39 PM
करण :
बव 07:44 AM
बालव 07:44 AM
पक्ष शुक्ल
योग घ्रुव 02:18 PM
वार गुरूवार

सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
सूर्योदय 06:23 AM
चन्द्रोदय 07:15 PM
चन्द्र राशि कन्या
चन्द्र वास दक्षिण
सूर्यास्त 06:52 PM
चन्द्रास्त चन्द्रास्त नहीं
ऋतु वसंत

हिन्दू मास एवं वर्ष
शक सम्वत 1948 पराभव
कलि सम्वत 5127
दिन काल 12:28 PM
विक्रम सम्वत 2083
मास अमांत चैत्र
मास पूर्णिमांत चैत्र

शुभ और अशुभ समय
शुभ समय
अभिजित 12:12:59 – 13:02:52
अशुभ समय
दुष्टमुहूर्त 10:33 AM – 11:23 AM
कंटक 03:32 PM – 04:22 PM
यमघण्ट 07:13 AM – 08:03 AM
राहु काल 02:11 PM – 03:44 PM
कुलिक 10:33 AM – 11:23 AM
कालवेला या अर्द्धयाम 05:12 PM – 06:02 PM
यमगण्ड 06:23 AM – 07:57 AM
गुलिक काल 09:30 AM – 11:04 AM
दिशा शूल
दिशा शूल दक्षिण

चन्द्रबल और ताराबल
ताराबल
अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
चन्द्रबल
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन

चोघडिया

शुभ 06:23:52 – 07:57:23
रोग 07:57:23 – 09:30:54
उद्वेग 09:30:54 – 11:04:24
चल 11:04:24 – 12:37:55
लाभ 12:37:55 – 14:11:26
अमृत 14:11:26 – 15:44:57
काल 15:44:57 – 17:18:28
शुभ 17:18:28 – 18:52:00
अमृत 18:52:00 – 20:18:20
चल 20:18:20 – 21:44:41
रोग 21:44:41 – 23:11:01
काल 23:11:01 – 24:37:21
लाभ 24:37:21 – 26:03:42
उद्वेग 26:03:42 – 27:30:02
शुभ 27:30:02 – 28:56:23
अमृत 28:56:23 – 30:22:43

लग्न तालिका

मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 05:35 AM समाप्त: 06:59 AM

मेष चर
शुरू: 06:59 AM समाप्त: 08:36 AM

वृषभ स्थिर
शुरू: 08:36 AM समाप्त: 10:33 AM

मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:33 AM समाप्त: 12:48 PM

कर्क चर
शुरू: 12:48 PM समाप्त: 03:08 PM

सिंह स्थिर
शुरू: 03:08 PM समाप्त: 05:25 PM

कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 05:25 PM समाप्त: 07:41 PM

तुला चर
शुरू: 07:41 PM समाप्त: 10:00 PM

वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:00 PM समाप्त: अगले दिन 00:19 AM

धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:19 AM समाप्त: अगले दिन 02:23 AM

मकर चर
शुरू: अगले दिन 02:23 AM समाप्त: अगले दिन 04:06 AM

कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 04:06 AM समाप्त: अगले दिन 05:35 AM

आप सभी हनुमान भक्तो को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें, जय श्री राम
आज मंदिर में भगवान हनुमान जी की प्रतिमा के सामने बैठ कर “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट” मंत्र की 3 – 5 – 7- 11 माला का जाप करें।
इसके बाद से नित्य एक माला का जाप करते रहें I
आज हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को तुलसी और गुलाब की माला अर्पित करें, इस उपाय को करने से शनि – राहु – मंगल आदि ग्रहो के प्रकोप में भी कमी आती है।
हनुमान जयंती के दिन हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा और पानी वाला नारियल अर्पित करें, ऐसा करने से सभी कार्य बनने लगते है कैरियर चमकने लगता है ।
आज के दिन मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके लाल पेड़े / बूंदी / या लड्डुओं का प्रशाद चढ़ाएं ।
हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से पूरे वर्ष के चोला चढ़ाने का फल मिल जाता है, इस लिए आज हनुमान जी को अवश्य ही चोला चढ़ाएं।
आज हनुमान जयंती पर किस भी मंदिर और अपने घर की छत पर लाल रंग का झंडा लगाएं इससे आकस्मिक संकटों से मुक्ति मिलती है ।

हनुमान जी को चोला

हनुमान जी को प्रसन्न करने, शनि के दोषों से छुटकारा पाने, शीघ्र उन्नति एवं समस्त बाधाओं के शमन के लिए हनुमान जी को चोला अर्पित करना कलयुग में रामबाण उपाय है। मान्यता है कि हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी को चोला चढाने से पूरे वर्ष का फल मिलता है I
चोले में चमेली के तेल में पीला सिन्दूर मिलाकर उसे हनुमान जी की प्रतिमा पर लेपन कर अच्‍छी तरह मलकर, रगड़कर चांदी या सोने का वर्क चढ़ाते हैं।

चोला चढ़ाने की सही विधि –

ध्यान रखे हनुमान जी को चोला सिर्फ उसी मूर्ति पर चढ़ाया जाता है जो सिंदूरी रंग की हो इसलिये सबसे पहले ऐसा मंदिर देखे जिसमे सिंदूरी रंग की मूर्ति स्थापित हो ।
मंदिर में पहुँचने पर हनुमान जी को प्रणाम करें । अगर हनुमान जी की मूर्ति पर पहले से कोई चोला चढ़ा हुआ हो तो उसे उतारे फिर स्नान कराये ।
इसके बाद सिंदूर को मूर्ति के साइज अनुसार गाय के घी या चमेली के तेल में घोले ।
घोल तैयार होने पर हनुमान जी मस्तक पर अपने दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से तिलक करके, उसी उंगली से बजरंगबली के दाहिने पैर से सिंदूर लगाना शुरू करे । हनुमान चालीसा या हनुमान जी के किसी मन्त्र का जाप करते हुए इसी प्रकार ऊपर बढ़ते हुए पूरी मूर्ति पर सिंदूर लगाये ।
सिंदूर लगने के बाद पूरी मूर्ति पर चाँदी अथवा सोने का पत्तर ( वर्क ) चिपकाये , फिर धुप दीप जलाकर कुंकुम चावल से तिलक करें, फिर मूर्ति को जनेऊ तथा गुलाब की माला पहनाये, हनुमान जी पर इत्र छिडके I
ये सब कार्य पूर्ण होने पर 1, 5 या 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करे, पाठ पूर्ण होने पर हनुमान से जो प्रार्थना करनी है I
इसके बाद हनुमान जी को नया लंगोटा, नया जनेऊ ,रामनामी गमछा, नई खड़ाऊ व लाल चंदन की माला या तुलसी की माला पहनाये।
अंत में हनुमान जी से आज्ञा लेकर पंडित जी के चरण छूकर, उन्हें दक्षिणा देकर उनसे आशीर्वाद लेकर घर आ जाये इस प्रकार विधि विधान से चोला चढ़ाने की विधि पूर्ण होती है

जिस पर शनिदेव जी की दशा चल रही हो ढैया या साढ़े सती उनके लिए चोला चढ़ाना अत्यंत लाभकारी है ।
जिन लोगो पर कोर्ट कचहरी का संकट हो, जो जमीन का काम करते हो, शत्रु परेशान करते हो, अपना भवन नहीं बन पा रहा हो तो उन लोगो को अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए हनुमान जी को चोला अवश्य ही चढ़ाना चाहिए ।
संकट या रोग दोष दूर करने के लिए चमेली के तेल में पीला सिंदूर मिलाकर शनिवार को चोला चढ़ाये और घर की सुख शांति, कारोबार में तरक्की, अपना घर बनाने हेतु देशी घी में पीला सिंदूर मिलकर मंगलवार को चोला चढ़ाये ।
मूर्ति पर सिंदूर लगाते समय हमारी स्वास मूर्ति पर ना लगे इसके लिए मुख पर कोई कपड़ा रख ले ।

पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE

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