श्रीडूंगरगढ़ खंड संघचालक आशाराम पारीक, नगर संघचालक विनोद कुमार सैन और मोमासर खंड संघचालक शिवरतन राजपुरोहित ने इस आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में तीन-चार गांवों को मिलाकर एक मंडल बनाया गया है, वहीं नगरीय क्षेत्रों में लगभग दस हजार की आबादी पर एक बस्ती का निर्माण किया गया है। संघ की योजना है कि इन सभी इकाइयों में पथ संचलन आयोजित किए जाएं।
श्रीडूंगरगढ़ नगरीय क्षेत्र में पथ संचलन कालूबास, बिग्गाबास, आडसर बास, मोमासर बास और प्रताप बस्ती क्षेत्र में होगा। वहीं, श्रीडूंगरगढ़ खंड के मंडलों, जिनमें धनेरू, इन्दपालसर, धर्मास, रिड़ी, सेरूणा, दुलचासर, सूडसर, सांवतसर, जाखासर और बापेऊ शामिल हैं, में भी संचलन आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, मोमासर खंड के तोलियासर, मोमासर, लिखमादेसर, आड़सर, रामसरा, पुंदलसर, हेमासर, गुसांईसर बड़ा, पूनरासर और उदरासर मंडलों में भी पथ संचलन होंगे। सुरजनसर गांव में भी एक विशेष पथ संचलन का आयोजन किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों में स्वयंसेवक उत्साहपूर्वक जुटे हुए हैं। वे गांव-गांव और बस्ती-बस्ती जाकर स्वयंसेवकों से गणवेश (वर्दी) की पूर्ति का आग्रह कर रहे हैं। स्वयंसेवकों की टोलियां बनाकर ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में लोगों से संपर्क किया जा रहा है।
खंड संघचालकों ने इच्छुक स्वयंसेवकों से अनुरोध किया है कि वे गणवेश पूर्ति के लिए अपने निकटतम संघ कार्यकर्ता से संपर्क करें।
संघचालकों ने इस अवसर को संघ के शताब्दी वर्ष का एक गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण बताया है। उनके अनुसार, पथ संचलन संघ के अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक होगा, और यह सभी स्वयंसेवकों को एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। यह आयोजन निश्चित रूप से श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में संघ की गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।