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19 अक्टूबर का पंचांग के साथ जाने और भी कई खास बातें पंडित श्रीडूंगरगढ़ ONE के साथ।

श्रीडूंगरगढ़ के पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE ने आज का पंचांग प्रस्तुत करते हुए बताया कि शास्त्रों में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के श्रवण और पठन का विशेष महत्व है। उनके अनुसार, पंचांग के इन पांच अंगों का नित्य स्मरण जीवन में शुभ फल प्रदान करता है।

पंचांग के अनुसार, आज त्रयोदशी तिथि दोपहर 01:53 तक रहेगी, जिसके बाद वणिज और विष्टि करण का प्रभाव रहेगा। नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी शाम 05:50 तक रहेगा। योग एन्द्र देर रात 02:04 तक है। कृष्ण पक्ष चल रहा है।

सूर्य और चंद्र की गणना के अनुसार, सूर्योदय सुबह 06:36 पर हुआ और सूर्यास्त शाम 06:01 पर होगा। चंद्रोदय सुबह 05:25 पर हुआ है और चंद्रास्त शाम 04:45 पर होगा। चन्द्र राशि कन्या है और चन्द्र वास दक्षिण दिशा में है। ऋतु शरद है।

पंचांग में शुभ और अशुभ समयों का भी विवरण दिया गया है। अभिजीत मुहूर्त 11:56 AM से 12:41 PM तक रहेगा। राहु काल 04:35 PM से 06:01 PM तक रहेगा। दिशा शूल पश्चिम दिशा में है।

ताराबल और चन्द्रबल की जानकारी भी दी गई है, जिसमें विभिन्न राशियों के लिए अनुकूल और प्रतिकूल नक्षत्रों का उल्लेख है।

दिन के चौघड़िया भी बताए गए हैं, जो शुभ और अशुभ कार्यों के लिए समय का निर्धारण करते हैं। लग्न तालिका में विभिन्न लग्न के समयों की जानकारी दी गई है।

पण्डित जी ने बताया कि रविवार के दिन सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्घ्य देना चाहिए। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना और यथासंभव मीठा भोजन करना शुभ माना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है और सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

इसके अतिरिक्त, रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन और आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते हैं। भैरव जी के मंत्र “ॐ काल भैरवाय नमः” या “ॐ श्री भैरवाय नमः” का जाप करने से रोगों और अकाल मृत्यु से बचाव होता है, और मनोवांछित लाभ मिलता है।

पण्डित जी ने काली चौदस की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।

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