परिजन तत्काल उसे श्रीडूंगरगढ़ के उपजिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बीकानेर के पीबीएम अस्पताल रेफर कर दिया। उम्मीद की एक किरण लिए परिजन बनवारी लाल को लेकर बीकानेर की ओर रवाना हुए, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। पीबीएम अस्पताल पहुंचने से पहले ही बनवारी लाल ने रास्ते में ही अपनी अंतिम सांस ली।
इस दुखद घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। बनवारी लाल के चाचा, जगदीश पुत्र लक्ष्मणराम जाट ने सेरूणा थाने में इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को पोस्टमार्टम करवाया और शव को परिजनों को सौंप दिया।
सेरूणा थाने के हैड कांस्टेबल आवड़दान इस मामले की जांच कर रहे हैं। वे घटना की परिस्थितियों और कारणों का पता लगाने में जुटे हैं।
बनवारी लाल की असामयिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। एक हंसता-खेलता किशोर, जो अपने परिवार के भविष्य का सहारा बनने की राह पर था, अचानक इस दुनिया से चला गया। यह घटना हमें जीवन की अनिश्चितता और क्षणभंगुरता का स्मरण कराती है।