आज, शनिवार, 15 नवंबर 2025 को श्रीडूंगरगढ़ में दिन की शुरुआत दैवीय आशीर्वाद और शुभ मुहूर्त के स्मरण के साथ हुई। पंचांग, जो काल गणना का एक प्राचीन और महत्वपूर्ण उपकरण है, आज के दिन के ताने-बाने को बुनता है।
शास्त्र कहते हैं कि तिथि का श्रवण माँ लक्ष्मी की कृपा का आह्वान करता है, वार सुनने से आयु बढ़ती है, नक्षत्र पापों का नाश करते हैं, योग प्रियजनों के साथ संबंध अटूट बनाता है, और करण मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।
आज मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जो तड़के 2 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी है, जो रात 11 बजकर 34 मिनट तक आकाश में अपनी आभा बिखेरेगा। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर हुआ और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 41 मिनट पर होगा, जिससे दिन 10 घंटे 46 मिनट और 14 सेकंड का होगा। ऋतु हेमंत है, जो शीतलता और उत्सवों का संदेश लेकर आती है।
शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। हालांकि, राहु काल सुबह 9 बजकर 36 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस दौरान महत्वपूर्ण कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
आज चंद्रमा कन्या राशि में है, जो दक्षिण दिशा में विराजमान है। ताराबल भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों के लिए अनुकूल है। चंद्रबल मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशियों के लिए शुभ है।
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि प्रात:काल पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सायंकाल तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है। इसी तरह, पीपल के नीचे हनुमान चालीसा का पाठ और गायत्री मंत्र का जाप भय को दूर करता है और बिगड़े कार्यों को बनाने में सहायक होता है।
शिवपुराण में वर्णित है कि शनि देव पिप्पलाद ऋषि का स्मरण करने वालों को पीड़ा नहीं देते। इसलिए, जिन पर शनि की दशा चल रही हो, उन्हें नित्य पिप्पलाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए या उनके तीन नामों – पिप्पलाद, गाधि, कौशिक – का जाप करना चाहिए।
आज उत्पन्ना एकादशी व्रत भी है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है।
यह जानकारी पंडित श्रीडूंगरगढ़ ONE द्वारा प्रदान की गई है।