श्रीडूंगरगढ़ से आज का पंचांग, हमारे दिन की दिशा तय करने वाली खगोलीय गणनाओं का सार, प्रस्तुत है। जैसे किसी प्राचीन ग्रंथ के पन्ने पलटते हैं, उसी श्रद्धा से हम इस पंचांग को देखते हैं, जो हमें समय के ताने-बाने में बुने शुभ और अशुभ मुहूर्त, ग्रहों की चाल और नक्षत्रों की स्थिति की जानकारी देता है।
पंचांग के अनुसार, आज तिथि नवमी है, जो रात्रि 11:36 तक रहेगी। नक्षत्र मघा का साया सायंकाल 07:38 तक रहेगा। तैतिल और गर करण दिन को विभाजित करेंगे। कृष्ण पक्ष है, जो चंद्रमा के घटते स्वरूप का प्रतीक है। योग ब्रह्म से शुरू होकर एन्द्र तक जाएगा, जो प्रातः 06:57 पर परिवर्तित होगा। वार, यानी दिन, गुरुवार है, जो बृहस्पति देव को समर्पित है।
सूर्योदय आज सुबह 06:53 पर हुआ, और सूर्यास्त सायं 05:42 पर होगा। चंद्रोदय रात्रि 01:33 पर होगा, और चंद्रास्त दोपहर 01:52 पर। चंद्रमा सिंह राशि में विराजमान हैं और पूर्व दिशा में वास करेंगे। ऋतु हेमंत है, जो शीतकाल के आगमन का संकेत है।
शक सम्वत 1947 विश्वावसु है, और विक्रम सम्वत 2082। मास अमांत कार्तिक है, और मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष। दिन काल 10 घंटे, 48 मिनट और 42 सेकंड का है।
पंचांग हमें शुभ और अशुभ समय के बारे में भी बताता है। अभिजीत मुहूर्त 11:56 AM से 12:39 PM तक रहेगा। वहीं, दुष्टमुहूर्त, कंटक, यमघण्ट, राहु काल, कुलिक, कालवेला/अर्द्धयाम और यमगण्ड जैसे अशुभ मुहूर्त भी दिन के विभिन्न समयों पर अपना प्रभाव दिखाएंगे। दिशा शूल दक्षिण दिशा में रहेगा।
ताराबल और चन्द्रबल की गणना भी दी गई है, जो नक्षत्रों और राशियों के अनुसार शुभता और अशुभता का निर्धारण करते हैं।
चोघड़िया के अनुसार, दिन और रात को विभिन्न मुहूर्तों में विभाजित किया गया है, जिनमें शुभ, रोग, उद्वेग, चल, लाभ, अमृत और काल शामिल हैं।
लग्न तालिका विभिन्न राशियों के उदय और अस्त होने का समय बताती है।
पंचांग के अंत में, गुरुवार के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इस बारे में कुछ सुझाव दिए गए हैं। यह भी बताया गया है कि गुरुवार को विष्णु जी की उपासना करना अत्यंत फलदाई होता है, और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।
पंडित श्रीडूंगरगढ़ ONE द्वारा प्रस्तुत यह पंचांग, हमें समय के महत्व को समझने और अपने जीवन को शुभता और समृद्धि से भरने में मदद करता है।