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1200 छात्रों के बीच अकेली लड़की, 3 लाख से शुरू किया सफर… आज 65 देशों में बिक रहे प्रोडक्ट

श्रीडूंगरगढ़ की बेटी ने बदली सोच, अश्वगंधा-शतावरी को रिसर्च के दम पर बनाया ग्लोबल ब्रांड

डूंगरगढ़ one 20 मार्च, 2026 श्रीडूंगरगढ़। राजस्थान के छोटे कस्बे श्रीडूंगरगढ़ से निकलकर वैश्विक पहचान बनाने वाली भगवती महेश बलदेवा की कहानी संघर्ष, हिम्मत और विजन का अनूठा उदाहरण है। जिस दौर में लड़कियों की पढ़ाई भी मुश्किल थी, उस समय 1200 छात्रों के बीच अकेली लड़की बनकर परीक्षा देने वाली भगवती आज हर्बल और न्यूट्रास्युटिकल इंडस्ट्री में अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी हैं।

डूंगरगढ़ one : भगवती देवी बलदेवा पति महेश बलदेवा के साथ

1970 का दौर: जब पढ़ाई भी चुनौती थी
1970 के दशक में श्रीडूंगरगढ़ जैसे कस्बों में बेटियों की पढ़ाई आम नहीं थी। कस्बे में कॉलेज तक नहीं था, ऐसे में उन्होंने कॉरेस्पोंडेंस से पढ़ाई की।
बीकॉम की परीक्षा देने जातीं तो 1200 स्टूडेंट्स में अकेली लड़की होती थीं। उसी समय उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें कुछ अलग करना है।

पिता का साथ बना सबसे बड़ी ताकत
परिवार और समाज की सीमित सोच के बीच उनके पिता बद्रीनाथ  सोमाणी ने साफ कहा था कि “ग्रेजुएशन से पहले शादी नहीं होगी।”
यही सोच उनकी सफलता की नींव बनी, जिसने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।

3 लाख के लोन से शुरू हुआ सफर
शादी के बाद हैदराबाद जाकर उन्होंने 1990 में पति के साथ पारंपरिक बिजनेस से हटकर केमिकल्स का काम शुरू किया।
महज 3 लाख रुपए के लोन से शुरू हुआ यह सफर आज 65 से ज्यादा देशों तक पहुंच चुका है।

आयुर्वेद को बनाया साइंटिफिक और ग्लोबल
भगवती बलदेवा ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा।
– अश्वगंधा पर 96 क्लिनिकल ट्रायल
– डबल-ब्लाइंड स्टडीज और इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिकेशन
– शतावरी के फायदों को वैज्ञानिक आधार
इसी रिसर्च-बेस्ड अप्रोच ने उनके प्रोडक्ट्स को इंटरनेशनल मार्केट में मजबूत पहचान दिलाई।

समाज और सिस्टम दोनों से मिली चुनौतियां
जब उन्होंने काम शुरू किया, तब लोगों का मानना था कि महिलाएं बिजनेस नहीं कर सकतीं।
यहां तक कि पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने पर अधिकारियों को भी भरोसा नहीं हुआ कि यह काम किसी महिला का हो सकता है।
हालांकि, उनके पति का मजबूत समर्थन हर मुश्किल में उनके साथ खड़ा रहा।

राजस्थान बन सकता है आयुर्वेद हब
उनका मानना है कि राजस्थान में अश्वगंधा और शतावरी जैसी फसलों की बड़ी संभावनाएं हैं।
अगर किसानों को सही मूल्य मिले और सरकार एफपीओ जैसे मॉडल को बढ़ावा दे, तो यह क्षेत्र देश के लिए बड़ा आर्थिक अवसर बन सकता है।

नई पीढ़ी के लिए संदेश
भगवती बलदेवा का कहना है कि आज के दौर में अवसरों की कमी नहीं है, लेकिन सही दिशा और ईमानदारी जरूरी है।
आधे-अधूरे मन से काम करने के बजाय पूरी तैयारी और इनोवेशन के साथ आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है।

15 साल की रिसर्च ने दिलाई वैश्विक पहचान
उन्होंने अश्वगंधा और शतावरी पर करीब 15 साल तक रिसर्च की और वैज्ञानिक प्रमाण जुटाए।
यही वजह है कि आज उनके प्रोडक्ट्स दुनिया के 65 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल हो रहे हैं और भारतीय आयुर्वेद को नई पहचान मिल रही है।
छोटे कस्बे से निकली एक लड़की ने साबित कर दिया कि अगर सोच बड़ी हो, तो दुनिया छोटी पड़ जाती है।

(Source: दैनिक भास्कर डिजिटल)

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