मुख्य सचिव सुधांश पंत ने गुरुवार को सचिवालय में सभी जिला कलक्टर्स के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है – काम की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं।”
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए, मुख्य सचिव ने सभी जिलों में तीन-तीन समितियाँ गठित करने के निर्देश दिए हैं। ये समितियाँ अलग-अलग विभागों के कार्यों का निरीक्षण करेंगी। प्रत्येक समिति अपनी रिपोर्ट जिला कलेक्टर को सौंपेगी, जिसके बाद कलेक्टर अपनी अनुशंसा सहित रिपोर्ट संबंधित विभाग के प्रभारी सचिव को भेजेंगे।
ये तीन समितियाँ इस प्रकार होंगी:
1. **सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के लिए समिति:** इस समिति में अधीक्षण अभियंता (दूसरे वृत्त से) और अधिशाषी अभियंता (गुण नियंत्रण खंड, दूसरे जिले से) शामिल होंगे।
2. **नगरीय विकास व आवासन / स्वायत्त शासन विभाग के लिए समिति:** इस समिति में अधीक्षण अभियंता (संबंधित वृत्त), अधिशाषी अभियंता (गुण नियंत्रण खंड), और अधिशाषी अभियंता (स्वायत्त शासन/नगरीय विकास विभाग) सदस्य रहेंगे।
3. **समग्र शिक्षा अभियान के भवन कार्यों के लिए समिति:** इस समिति में अधीक्षण अभियंता (संबंधित वृत्त), अधिशाषी अभियंता (गुण नियंत्रण खंड) और अधिशाषी अभियंता (समग्र शिक्षा अभियान) शामिल होंगे।
यह सर्वविदित है कि प्रदेश में सड़कों और भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर अक्सर शिकायतें आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार कई मामलों में मानक सामग्री का उपयोग न होने और मरम्मत में लापरवाही की बात सामने आई है। ऐसे में सरकार ने जमीनी स्तर पर सघन जांच का निर्णय लिया है ताकि कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इस अभियान का उद्देश्य यही है कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके और जनता को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं मिल सकें।
यह अभियान निश्चित रूप से प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।