श्रीडूंगरगढ़ के शांत परिवेश में आज शिक्षा और सेवा का एक अनूठा संगम देखने को मिला। हेल्पिंग हैंड्स, सूरत नामक एक संगठन ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, लिखमादेसर के प्रांगण में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। सूरज की पहली किरण के साथ ही विद्यालय का वातावरण उत्साह और उमंग से भर गया था।
यह संगठन, जो राजस्थान की धरती से जुड़े 42 निवासियों द्वारा संचालित है, पिछले 14 वर्षों से शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में एक मिसाल कायम कर रहा है। गुजरात के आदिवासी अंचल और महाराष्ट्र के पिछड़े क्षेत्रों में निस्वार्थ सेवा करने के बाद, इस संगठन ने अब अपनी जन्मभूमि, श्रीडूंगरगढ़ उपखंड के लिखमादेसर से राजस्थान में अपनी यात्रा का शुभारंभ किया है।
विद्यालय के प्राचार्य, लक्ष्मी कांत वर्मा ने बताया कि इस नेक कार्य में संगठन के सदस्य तेजकरण धाड़ेवा का विशेष योगदान रहा। यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि धाड़ेवा ने भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा इसी विद्यालय में प्राप्त की थी। अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपने गांव के बच्चों की मदद करने की उनकी भावना सराहनीय है।
कार्यक्रम की शुरुआत राधेश्याम सिद्ध की अध्यक्षता में सरस्वती वंदना से हुई। मंच पर विराजमान अतिथियों ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों को प्रेरणादायक संदेश दिए। कक्षा 1 से 12 तक के 328 जरूरतमंद विद्यार्थियों को बस्ता और लेखन सामग्री प्रदान की गई। नए बस्ते और लेखन सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी धनेश सैनी और उर्मिला चौधरी, ग्रामवासी मदन मेघवाल, देवाराम ज्याणी, ओमनाथ सिद्ध, गोविंद तिवारी, नोरतन जोशी, जसनाथी नवयुवक मंडल से बनवारी लाल पारीक के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षकगण उपस्थित थे। विद्यालय के उत्सव प्रभारी और प्राध्यापक भगवती पारीक ने कार्यक्रम का संचालन किया, और अपनी वाणी से सभी को बांधे रखा। यह कार्यक्रम न केवल शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर समाज को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।