श्रीडूंगरगढ़, 18 नवंबर, 2025। पिन्स रेजीडेंसी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सोमवार को स्कूल एज्युकेशन वेलफेयर एसोसिएशन (सेवा) राजस्थान का प्रादेशिक सम्मेलन आयोजित हुआ, जहाँ प्रदेशभर से आए निजी स्कूल संचालकों ने एकजुट होकर अपनी समस्याओं पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में निजी स्कूलों की चुनौतियों को लेकर एक 20 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संगठन के प्रदेशाध्यक्ष कोडाराम भादू ने कहा कि निजी विद्यालय लंबे समय से प्रशासनिक और नीतिगत दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सभी संचालकों से एक मंच पर आकर संगठित रूप से संघर्ष करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि अब वक़्त आ गया है कि हम अपनी आवाज़ बुलंद करें और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मिलकर प्रयास करें।
मुख्य अतिथि मृदला सामवेदी ने ‘सेवा’ संगठन द्वारा निजी स्कूलों के अधिकारों के लिए निभाई गई सकारात्मक भूमिका की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि संगठन भविष्य में भी अपने मूल्यों के साथ संघर्ष जारी रखेगा।
विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए डी. शशि कुमार (जनरल सेक्रेटरी, KAMC-Convener APSI, नई दिल्ली) ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि कई मामलों में कानूनी लड़ाई ही समाधान का रास्ता है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कर्नाटक में निजी स्कूलों के लिए उन्होंने किस प्रकार संघर्ष किया और कई बार राहत दिलाने में सफल रहे।
नीति शोध एवं आउटरीच संस्था फोर सिविल सोसाइटी से आए शोधकर्ता नितिश आनन्द ने निजी विद्यालयों की समस्याओं के व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत किए। उन्होंने नीति-शोध के साथ जमीनी आंकड़े तैयार करने पर जोर दिया, जिससे स्थायी सुधार संभव हो सके। भविष्य निधि विभाग के सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त मुकेश जैन ने स्कूल संचालकों से कर्मचारियों की भविष्य निधि नियमित रूप से जमा कराने की अपील की और इसके लाभों से अवगत कराया।
प्रदेश प्रवक्ता शैलेश भादाणी ने बताया कि सम्मेलन में राजस्थान के सभी जिलों से जिला अध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों ने भाग लिया। चर्चा सत्र में कई प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए और समस्याओं के समाधान पर सुझाव दिए।
कार्यक्रम के अंत में प्रिंस स्कूल के निदेशक दीपाराम जाट ने सभी अतिथियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में विद्यार्थियों ने स्वागत गीत और नृत्य की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल खुशनुमा बना रहा।
इस सम्मेलन ने निजी स्कूलों की समस्याओं को उजागर किया और एक मंच प्रदान किया जहाँ वे अपनी चुनौतियों पर विचार कर सकते हैं और समाधान के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 20 सूत्रीय मांग पत्र निजी स्कूलों की समस्याओं के समाधान में कितना कारगर साबित होता है।