श्रीडूंगरगढ़, 3 अक्टूबर 2025। अणुव्रत सप्ताह के तीसरे दिन, शुक्रवार की सुबह, स्थानीय मालू भवन में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दिन ‘सांप्रदायिक सौहार्द दिवस’ के रूप में मनाया गया, जिसमें विभिन्न धर्मों के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत नवकार महामंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया। सौहार्द दिवस की प्रभारी, अंजू पारख ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया, जो शांति और सद्भाव का संदेश लेकर आया।
साध्वी संगीतश्री जी ने सौहार्द दिवस के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब हम सब मिलकर प्रेम और सद्भाव से रहें। साध्वी संगीतश्री जी और साध्वी डॉ. परमप्रभाजी ने कहानियों और गीतों के माध्यम से श्रोताओं को प्रेरित किया, और बताया कि आचार्य तुलसी, महाप्रज्ञ, और महाश्रमण जी ने इस अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
तेरापंथी सभा से विजयराज सेठिया, महिला मंडल से मधु झाबक, और तेयुप के चमन श्रीमाल ने सांप्रदायिक सौहार्द के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने उपस्थित जनों को एक-दूसरे का सम्मान करने और प्रेम और सद्भाव का वातावरण बनाने का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम के सहप्रभारी, विमल भाटी ने कहा कि सौहार्द की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर, समाज और गांव से करनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट श्यामसुंदर आर्य ने सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण पर विशेष प्रकाश डाला और सभी को नशामुक्त रहकर सौहार्द का वातावरण बनाने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इमाम हुसैन फिक्र-ए-मिल्लत के अल्ताफ रजा और कृषि अधिकारी कन्हैयालाल सारस्वत ने भी अपने विचार व्यक्त किए और सांप्रदायिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया।
सभी वक्ताओं और अतिथियों का स्वागत दुपट्टा पहनाकर किया गया। अणुव्रत अध्यक्ष सुमति पारख, मंत्री एडवोकेट रणवीर खींची, और उपाध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन के.एल. जैन ने किया, जिन्होंने अपनी वाक्पटुता से कार्यक्रम को बांधे रखा।
कार्यक्रम में अणुव्रत समिति से विशाल स्वामी, शुभकरण पारीक, मुकेश स्वामी, अशोक झाबक, राज सर, सैन समाज अध्यक्ष ओमप्रकाश फुलभाटी, सभी संघीय संस्थाओं के प्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग और शहर के कई प्रतिष्ठित नागरिक शामिल हुए। यह कार्यक्रम श्रीडूंगरगढ़ में सांप्रदायिक सद्भाव और एकता की एक सुंदर मिसाल बना, जो समाज को एक साथ लाने और प्रेमपूर्ण वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।