सौभाग्यवश, यह घटना विद्यालय शुरू होने से पहले घटी, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। दीवार गिरने से मलबा मुख्य गली में फैल गया, जिससे ग्रामीणों में चिंता की लहर दौड़ गई।
ग्रामीणों ने विद्यालय के पुराने और जर्जर कमरों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षा विभाग को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय परिसर में लगभग 50 वर्ष पूर्व बने 8 कमरों में से कुछ की हालत बेहद खराब है। बारिश के दिनों में इन कमरों की छत से पानी टपकता है, जिसके चलते एक कमरे को विभाग द्वारा सील भी कर दिया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल स्कूल भवन की मरम्मत करवाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने जर्जर भवन की नियमित जांच करवाने का आग्रह किया है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पंचायत के प्रशासक, गोमंदराम मेघवाल ने बताया कि स्कूल की पूरी चारदीवारी पुरानी और जर्जर हो चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि इस स्थिति से प्रशासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने पुराने कमरों को तोड़कर नए कमरों का निर्माण करवाए जाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।
यह घटना शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और विद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है।