बुधवार का दिन था, जब विद्यालय परिसर में एक सादा समारोह आयोजित किया गया। सिराजुद्दीन, जो कभी इसी विद्यालय के छात्र थे, अपनी अम्मी और अब्बू की याद में इन कमरों का निर्माण करवा रहे हैं। उनकी उदारता सिर्फ कमरों तक ही सीमित नहीं है; वे दोनों कक्षों में विद्यार्थियों के लिए टेबल, कुर्सी और अन्य आवश्यक फर्नीचर भी उपलब्ध कराएंगे। इस पूरे कार्य में लगभग 11 लाख रूपए की लागत आने का अनुमान है।
भूमिपूजन समारोह में पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने शिक्षा के मंदिर में किए गए इस दान को भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। दानदाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह दान, विशेषकर बालिका विद्यालय के लिए, आने वाली कई पीढ़ियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सरोज वीर पूनियां ने भी सिराजुद्दीन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि दानदाताओं के सहयोग से विद्यालयों में हो रहे विकास कार्य निश्चित रूप से बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे। उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला दान बताया।
इस अवसर पर एसीबीईओ अशोक चुग और विद्यालय के प्रभारी पवन कुमार मोदी ने सिराजुद्दीन को सम्मानित किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में गाँव के कई गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए, जो इस नेक कार्य के साक्षी बने।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि शिक्षा के प्रति समाज का समर्पण और पूर्व छात्रों का अपनी जड़ों से जुड़ाव, किसी भी गाँव और विद्यालय के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।