अधिवक्ता ललित कुमार मारू के अनुसार, यह मामला 6 दिसंबर 2010 का है। उस समय श्रीडूंगरगढ़ के तत्कालीन एसएचओ शिवचंद ने कालू रोड पर राजेन्द्र कुमार और सुरेंद्र उर्फ सेंदिया को अवैध अफीम रखने के संदेह में गिरफ्तार किया था। राजेन्द्र कुमार, जो कि श्रीगंगानगर जिले के राजियासर थाना क्षेत्र के हिन्दोर गांव के निवासी हैं, और उनके साथी सुरेंद्र उर्फ सेंदिया, जो भी उसी गांव के रहने वाले हैं, पर आरोप था कि वे अवैध रूप से अफीम रख रहे थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरिता नौशाद की अदालत में चला। अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता ललित कुमार मारू ने पैरवी करते हुए अदालत के समक्ष बचाव पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
लम्बी सुनवाई के दौरान, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुना। आखिर में, न्यायाधीश ने सबूतों की कमी और संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि न्यायपालिका में सबूतों का महत्व सर्वोपरि है और संदेह के आधार पर किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले के समापन के साथ ही, पंद्रह साल से चले आ रहे एक लंबे और जटिल कानूनी प्रक्रिया का भी अंत हो गया।