कार्यक्रम की शुरुआत छात्रावास मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट श्यामसुंदर की अध्यक्षता में हुई। वातावरण में एक पवित्रता का भाव था, जब सुबह हवन के साथ दिन की शुरुआत हुई। इसके बाद, दोपहर 11 बजे, स्व. हीरा देवी (धर्मपत्नी चोखाराम जी बाना) की स्मृति में निर्मित मुख्य प्रवेश द्वार का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया, जो एक सुंदर श्रद्धांजलि थी और छात्रावास में प्रवेश करने वाली हर बालिका के लिए प्रेरणा का स्रोत।
समारोह का मुख्य आकर्षण उन 185 भामाशाहों का सम्मान था, जिन्होंने छात्रावास के विकास कार्यों में उदारतापूर्वक योगदान दिया था। इन दानदाताओं ने कुल 3.09 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की, जिससे छात्रावास को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने में मदद मिली। प्रत्येक भामाशाह को प्रशस्ति पत्र, साफा और माल्यार्पण से सम्मानित किया गया, जो समाज में उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था।
मंत्री सुशील ने छात्रावास की अब तक की प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर एक विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे भामाशाहों के सहयोग से छात्रावास ने बालिकाओं के लिए शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान किए हैं। इसके बाद, छात्रावास में नव प्रवेशित बालिकाओं का तिलक लगाकर स्वागत किया गया, जो एक नई शुरुआत और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक था।
कार्यक्रम में बोलते हुए, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में आमजन की भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समुदाय के प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य है कि वह इसे बढ़ावा दे। पूर्व प्रधान सुरजमल चौधरी ने इस छात्रावास को बालिका शिक्षा के लिए एक मील का पत्थर बताया। साहित्यकार श्याम महर्षि ने छात्रावास प्रबंधन को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार रखे, सभी ने शिक्षा के महत्व और समाज के विकास में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। यह कार्यक्रम न केवल एक उत्सव था, बल्कि यह एक अनुस्मारक भी था कि शिक्षा के माध्यम से ही हम एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, और इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है।