श्रीडूंगरगढ़, २४ अक्टूबर, २०२५। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आगामी शताब्दी वर्ष की आहट, श्रीडूंगरगढ़ में एक विशेष कार्यक्रम के साथ सुनाई दी। चिड़पड़नाथजी की बगीची में शुक्रवार को ‘ध्येय यात्रा के 100 वर्ष’ नामक एक पुस्तक का विमोचन किया गया, जो संघ के गौरवशाली इतिहास और भविष्य के लक्ष्यों पर प्रकाश डालती है।
खंड संघचालक आसाराम पारीक ने इस अवसर पर संघ की दूरगामी योजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक अब एक व्यापक गृह संपर्क अभियान चलाएंगे। इस अभियान के तहत, प्रत्येक हिंदू घर तक भारत माता के चित्र और ‘ध्येय यात्रा के 100 वर्ष’ नामक यह पुस्तक पहुंचाई जाएगी। यह केवल एक पुस्तक वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक विचार यात्रा है, जो हर घर तक संघ के विचारों को पहुंचाने का संकल्प लिए हुए है।
आसाराम पारीक ने इस अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका लक्ष्य हिंदू समाज को संगठित करना, जागृत करना और आत्मविश्वास से परिपूर्ण करना है। संघ के शताब्दी वर्ष को समर्पित यह अभियान मंडल स्तर पर पथ संचलन के बाद अब घर-घर संपर्क के माध्यम से आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जनवरी माह में प्रत्येक मंडल पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जहां समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ आकर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और सामूहिक रूप से आगे की राह तय करेंगे।
नगर संघचालक विनोद कुमार ने बताया कि स्वयंसेवक इन पुस्तकों और पत्रों के माध्यम से संघ के ध्येय, समाज में सकारात्मक परिवर्तन और समरसता के भाव को लेकर प्रत्येक हिंदू परिवार तक पहुंचेंगे। यह एक ऐसा प्रयास है, जिससे समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में संघ के कार्यकर्ताओं के साथ समाज की सज्जन शक्ति ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। यह न केवल संघ के सदस्यों के लिए, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था, जहां सभी ने मिलकर एक बेहतर भविष्य की कामना की। यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि संघ अपने सिद्धांतों और लक्ष्यों को लेकर कितना समर्पित है, और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कितना तत्पर है।