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श्रीडूंगरगढ़ : 2015 की आगजनी मामले में 6 आरोपी दोषमुक्त, मिला संदेह का लाभ- एफआईआर में नाम नहीं, चश्मदीद नहीं, गवाहों के बयान भी विरोधाभासी

डूंगरगढ़ one 15 फरवरी, 2026 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ में वर्ष 2015 की मध्यरात्रि को हुई आगजनी की सनसनीखेज घटना में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सेशन न्यायालय, श्रीडूंगरगढ़ ने सबूतों के अभाव में सभी 6 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

यह मामला एडीजे सरिता नौशाद की अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय दिया।

1 करोड़ के नुकसान का लगाया था आरोप

परिवादी शुभकरण पुत्र जयनारायण और अजीज पुत्र यासीन खां ने 31 अक्टूबर को श्रीडूंगरगढ़ थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि 23 अक्टूबर 2015 की मध्यरात्रि को मोमासर बास स्थित सरकारी अस्पताल के पास सब्जी मंडी में दो समुदायों के बीच हुए विवाद के दौरान असामाजिक तत्वों ने दुकानों में आग लगा दी। इस घटना में करीब 1 करोड़ रुपए का सामान जलकर नष्ट हो गया।

2016 में पेश हुआ था चालान

पुलिस ने अनुसंधान के बाद गौरीशंकर, हरिओम, चंद्रप्रकाश, अंकित, रामचंद्र और किशनलाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 147 व 436 में आरोप पत्र न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीडूंगरगढ़ में 29 जून 2016 को पेश किया।
8 नवंबर 2016 को आरोपों पर बहस हुई, जिसमें सभी आरोपियों ने अपराध से इनकार किया।

गवाहों के बयान बने कमजोर कड़ी

अभियोजन पक्ष की ओर से शुभकरण, अजीज, मोहम्मद शरीफ, मदनलाल, आमीन, रज्जाक, सिकंदर और बजरंगलाल के बयान दर्ज कराए गए। साथ ही एफआईआर, मौका नक्शा और पुलिस बयान दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में पेश किए गए।
हालांकि बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि एफआईआर में किसी आरोपी का नाम नहीं है, कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं। साथ ही आईओ भी अदालत में पेश नहीं हुआ।

अधिवक्ताओं की भूमिका रही अहम

अभियुक्तों की ओर से पैरवी कर एडवोकेट रामलाल नायक की दलीलों को अदालत ने स्वीकार किया। निर्णय के बाद युवाओं ने सहीराम सायच और उनके साथ ही भगवान नैण, मालाराम सायच, मनीष सायच और मेघराज वाल्मीकि का भी आभार जताया।

अदालत का स्पष्ट संदेश

अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि आपराधिक मामलों में सजा के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं। केवल संदेह या विरोधाभासी बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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