गुसाईंसर, डेलवाँ, ठुकरियासर, जैतासर, सुरजनसर, आडसर और उदरासर जैसे गांवों से पदयात्रा संघ निकले। आथुना बास बालाजी मंदिर से रवाना हुए एक संघ में लगभग 150 से अधिक श्रद्धालु शामिल थे, जिनकी श्रद्धा और उत्साह देखते ही बनता था।
डीजे पर बजते भजनों और गीतों की धुनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया था। श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगे नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे, और पूरे गांव में बालाजी के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही थी। पवन सारस्वत ने बताया कि संघ को विदा करने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा था। बच्चे, युवा और बुजुर्ग, सभी ने पदयात्रियों को आशीर्वाद देकर उनकी यात्रा को मंगलमय बनाने की कामना की।
गांव की सीमा पर स्थित सरस धर्मकांटे पर बीरबल तावनिया और अन्य ग्रामीणों ने पदयात्रियों का स्वागत किया। तावनिया ने हरी झंडी दिखाकर संघ को सालासर धाम के लिए रवाना किया, मानो उनके कंधों पर एक पवित्र जिम्मेदारी आ गई हो।
इस अवसर पर पूर्व सरपंच तुलछीराम गोदारा, पूर्व सरपंच लेखराम गोदारा, बाबूलाल पंचारिया, गोपालराम पंचारिया, मोहनराम तावनिया, श्रीराम गोदारा, बेगाराम नाई, केसुराम सोनी और पवन सारस्वत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी श्रद्धा और सेवा से इस आयोजन को सफल बनाया।
इसी प्रकार, उदरासर से भी बालाजी महाराज का पदयात्रा संघ बड़े ही धूमधाम से रवाना हुआ। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से पदयात्रियों का अभिनंदन किया और गांव की सीमा तक उन्हें विदा किया, जैसे अपने प्रियजनों को स्नेहपूर्ण विदाई दी जाती है। हर चेहरे पर भक्ति का भाव था और हर कदम में सालासर बालाजी के प्रति अटूट विश्वास। यह दृश्य निश्चित रूप से हर देखने वाले को श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंग रहा था।