श्रीडूंगरगढ़ में जैन समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण पर्व, पर्यूषण, 20 अगस्त से शुरू हो चुका है। सेवा केंद्र मालू भवन से इस पर्व का शुभारंभ हुआ, जो 28 अगस्त तक चलेगा। यह पर्व, आत्म-अनुशासन और क्षमा के महत्व को रेखांकित करता है, जिसका समापन सामूहिक क्षमायाचना के साथ होगा।
पर्यूषण पर्व के दौरान विभिन्न दिवसों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें खाद्य संयम, स्वाध्याय, अभिनव सामयिक और वाणी संयम दिवस शामिल हैं। प्रत्येक दिवस का अपना विशेष महत्व है और यह जैन दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है।
आज, अणुव्रत चेतना दिवस साध्वी संगीतश्री और डॉ. साध्वी परमप्रभा के सान्निध्य में मनाया गया। साध्वी मुदिताश्री ने अणुव्रत के महत्व को समझाया, जबकि डॉ. साध्वी परमप्रभा ने भगवान महावीर के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। साध्वी संगीतश्री ने आगम वाणी को जीवन का मार्गदर्शन करने वाला और आत्म कल्याण का मार्ग बताया। उन्होंने अणुव्रत के नियमों की जानकारी देते हुए उन्हें जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर साध्वी ने जयाचार्य के समय की एक घटना का उल्लेख करते हुए श्रीडूंगरगढ़ के श्रावक सुखलाल मालू को याद किया।
पर्युषण पर्व के दौरान, प्रतिदिन सुबह और शाम साध्वी संगीतश्री एवं डॉ. साध्वी परमप्रभा के प्रवचन हो रहे हैं, जिनमें भगवान महावीर के पूर्व जन्मों का सरल और सहज वर्णन किया जा रहा है। दिन में महिला मंडल के नेतृत्व में नमस्कार महामंत्र का अखंड जप चल रहा है, जबकि रात को युवक परिषद, किशोर मंडल, तेरापंथी सभा और ओसवाल पंचायत द्वारा जप किया जा रहा है।
पर्युषण पर्व के शेष दिनों में जप दिवस, ध्यान दिवस और संवत्सरी महापर्व जैसे आयोजन होंगे। संवत्सरी महापर्व पर समाज के लोग उपवास रखेंगे।
28 अगस्त को सेवा केंद्र मालू भवन में सामूहिक क्षमा याचना का कार्यक्रम होगा। श्री ओसवाल पंचायत के मंत्री कांति कुमार पुगलिया के अनुसार, इसके बाद श्री ओसवाल पंचायत द्वारा सामूहिक पारणा का आयोजन किया जाएगा।
पर्युषण पर्व जैन समुदाय के लिए आत्म-चिंतन, आत्म-सुधार और क्षमा मांगने का एक अवसर है। यह पर्व हमें अपने जीवन में सरलता, सत्य और अहिंसा के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। बड़ी संख्या में श्रावक और श्राविकाएं इन आयोजनों में भाग लेकर धर्मोपदेश सुन रहे हैं, जो इस पर्व के महत्व को दर्शाता है।