श्रीडूंगरगढ़ ONE 22 जनवरी 2026।
(ये आलेख पूर्ण पुख्ता सबूतों के आधार पर सामाजिक जिम्मेदारी के गहरे एहसास के साथ प्रकाशित किया जा रहा है।)
बच्चे देश का भविष्य है परंतु दुर्भाग्य है कि आज के समय में अनेकों ऐसे माध्यम व साधन उपलब्ध है जिससे इन मासूमों के भविष्य को अंधकार की ओर धकलने में सहायक बन रहें है। यूं तो प्रतिबंधित वस्तुएं भारत में बिकना सामान्य सी बात है परंतु ये मसला हमारी युवा पीढ़ी का है। पंजाब के बाद श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर युवाओं में नशे के दुष्प्रभाव से जूझ रहें है और परेशान माता पिता खून के आंसू रो रहें है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्षेत्र में सामाजिक चिंतकों, शिक्षिकों व अभिभावकों को जागरूक होने व सचेत होने की जरूरत है।
श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में भी अभिभावकों के लिए बच्चों की परवरिश की चुनौती बढ़ गई है। यहां 14 साल से 18 साल तक के किशोरों के लिए नशे का वैप यानी ई सिगरेट सरेआम बाजार में उपलब्ध है। ये प्रतिबंधित भी है और नाबालिग को बेचना भी आपराधिक है। परंतु गत दिनों से यहां कई स्कूलों के बच्चों के बैग में ये वैप मिलने की घटनाएं सामने आ रही है। कुछ अभिभावकों ने बच्चों को इससे बचाने की बात कहते हुए जानकारी भी दी है। वहीं स्कूल संचालक भी इसे लेकर सख्त रवैया अपना रहें है। वहीं प्रबुद्ध शिक्षकों ने प्रशासन व पुलिस की जिम्मेदारी बताते हुए उन्हें मुक दर्शक नहीं बन कर ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अम्ल में लाने की गुजारिश की है। भारत में वेप/ई-सिगरेट “इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019” के तहत प्रतिबंधित है। कानूनन ई-सिगरेट का निर्माण, आयात-निर्यात, परिवहन, बिक्री-वितरण, भंडारण और विज्ञापन करना दंडनीय अपराध है। ये वेप सरेआम 600 रूपए से 1500 तक मिल रही है।
क्या होता है वेप या ई सिगरेट।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। वेप (Vape) या ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। जिसमें तरल (ई-लिक्विड) को गर्म करके एयरोसोल बनाता है, जिसे लोग सांस के साथ अंदर लेते हैं। वेप मुख्यतः बैटरी, हीटिंग कॉइल/एटोमाइज़र, विक (कॉटन), और टैंक/पॉड से बनती है। इसके टैंक में ई-लिक्विड होता है, जिसमें सामान्यतः प्रोपाइलीन ग्लाइकोल (PG), वेजिटेबल ग्लिसरीन (VG), अलग-अलग फ्लेवरिंग केमिकल्स, और अक्सर निकोटिन मिलाया जाता है। कुछ अवैध/अनियमित उत्पादों में अन्य नशीले पदार्थ भी मिलाए जा सकते हैं।
वेप के सेवन से हो रहें गंभीर नुकसान।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। वेप के सेवन के कई नुकसान बताए गए हैं। सबसे बड़ा खतरा निकोटिन की लत है, जिससे ध्यान-एकाग्रता, नींद और मूड पर असर पड़ सकता है। किशोरों/युवाओं में यह मस्तिष्क विकास के लिए अधिक हानिकारक माना जाता है। वेप के एयरोसोल में मौजूद रसायन और गर्म होने पर बनने वाले कुछ यौगिक गले व फेफड़ों में जलन, खांसी, सांस फूलना जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। कुछ मामलों में गंभीर फेफड़ों की चोट (लंग इंजरी) की कई रिपोर्टस में मिली है। लंबे समय तक उपयोग से हृदय-रक्तवाहिकाओं पर जोखिम बढ़ने की आशंका भी बताई जाती है। साथ ही ई-लिक्विड गलती से निगलने या बच्चों के हाथ लगने पर निकोटिन विषाक्तता का खतरा रहता है।