श्रीडूंगरगढ़, 31 अगस्त, 2025। एक सदी पहले जलाई गई ज्योति, आज भी अपने प्रकाश से जन-जन को आलोकित कर रही है। गायत्री परिवार के संस्थापक, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने वर्ष 1926 में जो अखंड दीपक प्रज्वलित किया था, उसके शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में निकली अखंड ज्योति कलश यात्रा रविवार को श्रीडूंगरगढ़ पहुंची। यह यात्रा एक स्मृति है, एक प्रेरणा है, और एक संकल्प है, जो हमें उस प्रकाश की ओर ले जाती है जो पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने हमारे जीवन में जलाया।
नगर में इस यात्रा का आगमन एक उत्सव की तरह था। सुबह, श्रीगणेश मंदिर बिग्गा बास से कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। यह यात्रा, मानो अपने साथ श्रद्धा और भक्ति का एक कारवां लेकर निकली थी। नगर के मुख्य बाजारों से गुज़रते हुए, इसने हर हृदय को स्पर्श किया। मातृशक्ति, बहनों और सेवा कुंज छात्रावास की बालिकाओं ने इस यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लिया, जो इस बात का प्रतीक था कि यह ज्योति हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
यात्रा का समापन सेवा भारती समिति द्वारा संचालित सेवा कुंज छात्रावास में हुआ, जहाँ पंचकुंडी महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। नगरवासियों के साथ गायत्री परिवार के सदस्यों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया। यज्ञ की पवित्र अग्नि में आहुतियां दी गईं, मंत्रों का उच्चारण हुआ, और वातावरण श्रद्धा और भक्ति से सराबोर हो गया।
आयोजकों के अनुसार, यह रथ यात्रा, जो रविवार से शुरू हुई है, आगामी 10 सितंबर तक श्रीडूंगरगढ़ तहसील के विभिन्न गांवों का भ्रमण करेगी। यह यात्रा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह एक अवसर है, जिससे लोग एक साथ आएं, अपने मूल्यों को याद करें, और एक बेहतर भविष्य के लिए संकल्प लें। यह यात्रा, अपने साथ प्रेम, शांति और सद्भाव का संदेश लेकर, हर गांव और हर घर तक पहुंचेगी।