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श्रीडूंगरगढ़ में डीएपी के लिए किसान परेशान, अटकी रबी फसल की बुआई, खेती बाड़ी हो रही प्रभावित, जताई नाराजगी।

श्रीडूंगरगढ़, 12 अक्टूबर 2025।

श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के किसानों के लिए इन दिनों चिंता का माहौल है। रबी की बुवाई का समय आ गया है, लेकिन डीएपी खाद की आपूर्ति बाधित होने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है। खेतों में बुवाई का काम रुका हुआ है और किसान खाद के लिए सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं।

सुबह होते ही किसान सहकारी समितियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हो जाते हैं, इस उम्मीद में कि शायद आज उन्हें खाद मिल जाएगी। लेकिन कई बार दिनभर इंतजार करने के बाद भी उन्हें खाली हाथ मायूस होकर घर लौटना पड़ता है। किसानों का कहना है कि रविवार को मंडी में जय किसान सहकारी समिति पर केवल 600 बैग डीएपी खाद आई, जो क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से नाकाफी है। किसानों ने इस बात पर नाराजगी जताई और स्थिति तब और बिगड़ गई जब खाद वितरण के दौरान धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। समिति के सदस्यों को एक बार वितरण रोकना पड़ा, हालांकि बाद में इसे फिर से शुरू कर दिया गया। खबर लिखे जाने तक 368 बैग खाद शेष थे, जिनका वितरण किसानों को किया जा रहा था।

इस गंभीर स्थिति पर पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि डीएपी की पूरी आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। महिया का कहना है कि सरकार की लापरवाही और व्यवस्थागत खामियों के कारण किसानों की बुवाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि खेत तैयार हैं, लेकिन खाद की कमी के कारण बुवाई में देरी हो रही है। महिया ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले आंदोलन किया जाएगा।

कृषि विभाग के सहायक निदेशक रघुवर दयाल सुथार ने बताया कि खाद वितरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके अनुसार, किसी भी किसान को पांच से अधिक बैग नहीं दिए जाएंगे। यदि किसानों की संख्या अधिक है तो प्रत्येक किसान को दो या तीन बैग ही दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर खाद का वितरण किया जाएगा और सभी किसानों के मोबाइल नंबर लेकर रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। इसके साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसान के अतिरिक्त किसी और को खाद न मिले। वितरण व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कृषि विभाग के कर्मचारी मौके पर तैनात किए गए हैं। कर्मचारियों ने बताया कि यदि अत्यधिक भीड़ होती है तो पुलिस की मदद भी ली जाएगी।

इस बीच, किसान खाद की आस में समितियों के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। यह देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस समस्या का समाधान कैसे निकालते हैं और किसानों को कब तक राहत मिलती है।

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