कार्यक्रम की शुरुआत डाॅ. भीमराव अम्बेडकर राजकीय छात्रावास के भूमि पूजन से हुई। यह छात्रावास 2.80 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा, जो विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का बेहतर वातावरण तैयार करेगा।
विधायक सारस्वत ने इस अवसर पर बताया कि छात्रावास भवन का भूतल 703.50 वर्गमीटर और प्रथम तल 689.23 वर्गमीटर का होगा। इसमें 13 कमरे, वाचनालय, रसोईघर, भोजन कक्ष, स्नानघर व शौचालय जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि छात्रावास का निर्माण कार्य जुलाई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त निदेशक एलडी पंवार ने बताया कि इस छात्रावास में 50 विद्यार्थियों के ठहरने की सुविधा होगी और राज्य सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार उन्हें भोजन, नाश्ता और वस्त्र भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके बाद मंत्री मेघवाल और विधायक सारस्वत ने भोजास में 2.50 करोड़ रुपए की लागत से बने 33/11 केवी जीएसएस का लोकार्पण किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा कि “यह जीएसएस बनने से क्षेत्र की बिजली समस्या का स्थायी समाधान होगा।” विधायक सारस्वत ने विद्युत तंत्र के सुदृढ़ीकरण को किसानों और आमजन के लिए बड़ी राहत बताया।
झंझेऊ में भी 3 करोड़ रुपए से अधिक लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया, जिसमें सामुदायिक भवन, बरामदा और शेड शामिल हैं। मेघवाल ने यहां 10 लाख रुपए की लागत से एक नए सामुदायिक भवन के निर्माण की घोषणा भी की।
नारसीसर से कुचोर मार्ग पर 4.38 करोड़ रुपए की लागत से बने रेलवे अंडरब्रिज (RUB) का लोकार्पण भी इस दिन हुआ। मेघवाल ने कहा कि “इस आरयूबी से हजारों लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।” सारस्वत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी सोच को श्रीडूंगरगढ़ के लिए एक अहम सौगात बताया।
विद्युत तंत्र को मजबूत करने की दिशा में तोलियासर में 39.52 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 132 केवी जीएसएस का भूमि पूजन, जालबसर में 2.50 करोड़ रुपए के जीएसएस का लोकार्पण, और गुसाईंसर बड़ा में 48.52 करोड़ रुपए के जीएसएस का भूमि पूजन किया गया।
मेघवाल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हर खेत और हर गांव तक बिजली पहुंचाना है। वहीं, सारस्वत ने कृषि प्रधान क्षेत्र के लिए इन जीएसएस को जीवनरेखा बताया।
इस अवसर पर विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, पालिकाध्यक्ष मानमल शर्मा, एसडीएम शुभम शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुरेन्द्र कुमार, अभियंता देवराज हटीला, रामदेव बोहरा, जगदीश पारीक, बजरंग सारस्वत सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और आमजन मौजूद रहे। यह दिन श्रीडूंगरगढ़ के विकास के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।