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श्रीडूंगरगढ़ के PM SHRI स्कूल में 318 बच्चे… पर पढ़ाने को शिक्षक नहीं

230 स्कूलों में स्टूडेंट जीरो, फिर भी 310 टीचर खाली बैठे

डूंगरगढ़ one 11 दिसम्बर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। राज्य में 230 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी विद्यार्थी नहीं है, लेकिन वहाँ 310 शिक्षक रोजाना हाजिरी लगाकर वेतन ले रहे हैं। वहीं श्रीडूंगरगढ़ के सबसे बड़े सरकारी विद्यालय PM SHRI राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में 318 विद्यार्थी तो हैं, पर उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं। दोनों स्थितियाँ मिलकर सरकार की शिक्षा नीति और तंत्र पर बड़ा प्रश्नचिह्न छोड़ती हैं।

जिन स्कूलों में स्टूडेंट जीरो, वहां शिक्षक मौजूद…

जिनमें बच्चे पढ़ने आते हैं, उन स्कूलों में शिक्षक गायब

PM SHRI स्कूल में विज्ञान और कृषि जैसे मुख्य संकायों की हालत सबसे खराब है। बायोलॉजी में 27 विद्यार्थी हैं, लेकिन शिक्षक एक भी नहीं। कृषि विज्ञान में 16 विद्यार्थी हैं, पर स्वीकृत एक पद लंबे समय से खाली पड़ा है। फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित, इंग्लिश और इतिहास जैसे विषयों में भी पद रिक्त हैं। कुल 46 स्वीकृत पदों में से केवल 22 भरे हुए हैं, जबकि 24 पद खाली हैं। यानी स्कूल आधे स्टाफ के भरोसे चल रहा है और विद्यार्थी अधूरे पाठ्यक्रम तथा कमजोर अध्यापन की मार झेल रहे हैं।

कक्षाओं में बच्चे किताबें खोलकर बैठे हैं… पर पढ़ाने वाला कोई नहीं

अभिभावक गणेशाराम शर्मा कहते हैं कि स्कूल का नाम PM SHRI है, लेकिन बच्चों के लिए शिक्षक के रूप में कोई मार्गदर्शक नहीं। उनके अनुसार गरीब और ग्रामीण छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, लेकिन सरकारी तंत्र को इसकी परवाह नहीं। ऐसे में विद्यार्थी मजबूरी में निजी स्कूलों का रुख करते हैं और माता-पिता बढ़ती फीस का बोझ झेलने को मजबूर हो जाते हैं।

‘डूंगरगढ़ one से पता चला’, बोले विधायक; सीबीईओ बोलीं- मानदेय पर शिक्षक रखो

विधायक ताराचंद सारस्वत ने कहा कि उन्हें इस हालात की जानकारी डूंगरगढ़ one के जरिए मिली है और वे जल्द ही समाधान की दिशा में कार्रवाई करेंगे। सवाल यह है कि इतनी बड़ी समस्या जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को पहले क्यों नहीं दिखी।

सीबीईओ सरोज पुनिया वीर का कहना है कि यह PM SHRI स्कूल है, इसलिए स्कूल प्रबंधन चाहे तो मानदेय पर निजी शिक्षक रख सकता है, जबकि सरकारी पोस्ट पर नियुक्ति सरकार स्तर पर होती है। प्रधानाचार्य ममता भी स्वीकार करती हैं कि पद खाली होने के कारण पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित होती है और जल्द नियुक्ति जरूरी है।

सरकारी तंत्र के लिए चुनौतियों का आईना: सुधार फाइलों में, जमीन पर हालात बिगड़े

यह पूरा मामला प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की असलियत उजागर करता है। एक तरफ सरकार आधुनिक शिक्षा, स्मार्ट क्लास और बेहतर सुविधाओं की बात करती है, और दूसरी तरफ इस PM SHRI स्कूल में बच्चे बिना शिक्षक के बैठने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि क्या सुधार सिर्फ घोषणाओं में ही रह जाएंगे, या सरकार उन कक्षाओं तक पहुंचेगी जहाँ बच्चे रोज स्कूल आते हैं। एक ऐसे शिक्षक के इंतजार में, जो आए और उन्हें पढ़ाए।

अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इन 318 बच्चों का नुकसान सिर्फ इस सत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके पूरे भविष्य पर इसका असर पड़ेगा। यह समय है जब सरकार और प्रशासन दोनों को सोचना होगा कि शिक्षा सुधार की असली कसौटी जमीन पर खड़े ये बच्चे हैं, न कि कागजों में दर्ज अप-टू-डेट रिपोर्टें।

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