इस परीक्षा के माध्यम से 972 अभ्यर्थियों को प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा, लेखा सेवा और अन्य अधीनस्थ सेवाओं में नियुक्त किया जाएगा। मोहन कंवर की यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनका तीसरा प्रयास था।
अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने पति कुलदीप चारण को दिया। उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक और कॉलेज शिक्षा चीला गांव और श्रीबालाजी नागौर के सरकारी स्कूलों में, पूर्ण ग्रामीण परिवेश में हुई। विवाह के बाद बीकानेर में सब इंस्पेक्टर शिवरतन सिंह के परिवार में बहू बनकर आने के बाद, उन्हें परिवार का भरपूर सहयोग मिला, जिसके चलते वे पटवारी की नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी जारी रख सकीं।
मोहन कंवर बताती हैं कि 2018 में उन्होंने एक बार कोचिंग से अध्ययन किया था, परंतु उसके बाद वे निरंतर स्वयं अध्ययन में जुटी रहीं। तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को उन्होंने संदेश दिया कि वे कड़ी मेहनत के बल पर परीक्षा के पाठ्यक्रम को अक्षरशः ध्यान में रखते हुए अध्ययन में निरंतरता बनाए रखें, यही सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं का मार्ग कठिन अवश्य है, लेकिन धैर्य और निरंतर अध्ययन ही सफलता की कुंजी है।
मोहन कंवर को श्रीडूंगरगढ़ के उपखंड अधिकारी शुभम शर्मा, तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा, नायब तहसीलदार सुरजीत कुमार धायल व विनोद मीणा, गिरदावर शंकरलाल जाखड़, गिरधारीलाल, प्रह्लादसिंह, चैनसिंह, पटवारी हरिराम सारण, सीताराम, सुनीता चौधरी, लीला स्वामी व निकिता सहित अनेक सहयोगियों ने परिणाम जारी होने के साथ ही बधाई दी।
श्रीडूंगरगढ़ के पटवारी वर्ग में प्रसन्नता का माहौल है, वहीं मोहन कंवर के घर में उत्सव छाया हुआ है। बधाई देने वालों और मुंह मीठा करवाने के लिए परिजनों का तांता लगा हुआ है।