शहीदों की शहादत…एक ऐसा ऋण जिसे राष्ट्र कभी चुका नहीं सकता। यह उन्हीं के बलिदान का प्रतिफल है कि देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और हर देशवासी गर्व से अपना जीवन जी रहा है। आज, श्रीडूंगरगढ़ के गांव धीरदेसर चोटियान में एक ऐसा ही भावुक दृश्य उपस्थित हुआ, जब शहीद बजरंगलाल चोटिया की 17वीं पुण्यतिथि मनाई गई।
बजरंगलाल चोटिया, जिन्होंने सीआरपीएफ में अपनी सेवाएं देते हुए असम बॉर्डर पर 26 सितंबर 2008 को देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी शहादत को याद करते हुए, आज उनके पैतृक गांव में शहीद नायक राकेश चोटिया राउमावि के प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
गाँव के गणमान्य लोगों ने शहीद बजरंगलाल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। माहौल उस समय और भी भावुक हो गया जब शहीद की वीरांगना मंजू देवी, उनके पुत्र दिनेश चोटिया, और परिवार के सदस्य रामनिवास चोटिया, मोटाराम चोटिया, तोलाराम चोटिया, मदनलाल बारोटिया, मदनलाल चोटिया, सांवरमल सहु, सीताराम, किशनलाल चोटिया, मुनीराम, बाबूलाल, और मदनलाल ने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। स्कूल के शिक्षक और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी इस अवसर पर उपस्थित थे, जिन्होंने शहीद को श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर ‘भारत माता की जय’ के नारों से आसमान गूंज उठा, जो शहीद के प्रति सम्मान और देशप्रेम का प्रतीक था। यह दिन न केवल शहीद को याद करने का था, बल्कि उन मूल्यों को भी संजोने का था, जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया।