श्रीडूंगरगढ़, 7 नवंबर, 2025: आज श्रीडूंगरगढ़ में एक अद्भुत दृश्य उपस्थित हुआ। वंदे मातरम, हमारे राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, क्षेत्र के सरकारी और निजी विद्यालयों में सुबह 10:15 बजे एक साथ सामूहिक गायन का आयोजन किया गया। हर विद्यालय मानो देशभक्ति के रंग में रंगा हुआ था।
विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालय के अन्य कर्मचारियों ने एक साथ मिलकर वंदे मातरम का गायन किया। ऐसा लग रहा था जैसे हर कंठ से भारत माता की वंदना निकल रही हो।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सरोज पूनियां वीर ने सातलेरा राउमावि में इस सामूहिक गायन में भाग लिया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रसेवा में समर्पित रहने और जिम्मेदारी के साथ योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को जीवन में अनुशासन के महत्व के बारे में भी बताया। उनके शब्दों में भविष्य के नागरिकों के लिए एक गहरा संदेश था।
पूरे स्कूल परिसर में देशभक्ति का वातावरण छाया रहा। हर तरफ उत्साह और गौरव की भावना महसूस हो रही थी। संस्था प्रधानों ने विद्यार्थियों को वंदे मातरम गीत की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा किए जाने की जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार गाया था। यह भी बताया गया कि संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था।
आज इस गीत को 150 वर्ष पूरे हो गए हैं, और इस अवसर को विशेष बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया है। सूत्रों के अनुसार, आज से एक वर्ष तक पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री ने की है।
आज श्रीडूंगरगढ़ में वंदे मातरम की गूंज ने हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की भावना को और भी प्रबल कर दिया। यह दिन हमें अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण की याद दिलाता है।