जाखासर पुराना, सेरूणा और लिखमादेसर मंडलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए। सेरूणा मंडल (सेरूणा, झंझेऊ, जोधासर, नारसीसर) का कार्यक्रम सेरूणा ग्राम में आयोजित किया गया, जहाँ स्वयंसेवकों ने मिलकर राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। इसी प्रकार, जाखासर मंडल (जाखासर नया, जाखासर पुराना, कल्याणसर नया, कल्याणसर पुराना, कुनपालसर, राणासर) का कार्यक्रम जाखासर पुराना ग्राम में आयोजित हुआ, जहाँ ग्रामीण परिवेश में संघ की विचारधारा का प्रसार हुआ। लिखमादेसर मंडल (लिखमादेसर, कुंतासर, रेवाड़ा, धीरदेसर चोटियान) का कार्यक्रम लिखमादेसर ग्राम में आयोजित हुआ, जहाँ युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रमों की शुरुआत शस्त्र पूजन के साथ हुई, जो हमारी संस्कृति में शक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। इसके बाद, बौद्धिक सत्रों का आयोजन किया गया, जहाँ संघ के क्रमिक विकास, स्वयंसेवकों द्वारा किए गए सेवा कार्यों और विचार परिवार के संगठनों की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने संघ के इतिहास और वर्तमान में समाज के लिए किए जा रहे कार्यों पर विस्तार से जानकारी दी। पंच प्रण और शताब्दी वर्ष के अन्य कार्यक्रमों के बारे में भी स्वयंसेवकों को अवगत कराया गया।
सेरूणा में अनिल सोनी, लिखमादेसर में सुरेश कुमार और जाखासर पुराना में प्रदीप कुमार ने बौद्धिक सत्रों का संचालन किया। लिखमादेसर में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता पूज्य संत सोमनाथ महाराज ने की, जिन्होंने स्वयंसेवकों को आशीर्वाद दिया और उन्हें राष्ट्र सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
उत्सव में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों, समाजबंधुओं और भगिनियों ने भाग लिया। पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसका पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया।
इसी क्रम में, आने वाले दिनों में पुंदलसर मंडल का विजयदशमी उत्सव बाना ग्राम में और 7 अक्टूबर को तौलियासर मंडल का पथ संचलन तोलियासर ग्राम में आयोजित किया जाएगा। ये कार्यक्रम न केवल उत्सव हैं, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।