श्रीडूंगरगढ़ में संघ के सदस्यों में इस अवसर को लेकर उत्साह का माहौल है। खंड संघचालक आशाराम पारीक ने बताया कि कार्यक्रमों की श्रृंखला में पहला कार्यक्रम 2 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मंडल और बस्ती स्तर पर पथ संचलन के रूप में आयोजित किया जाएगा।
नगर संघचालक विनोद कुमार सैन और मोमासर खंड संघचालक शिवरतन राजपुरोहित ने संघ की संरचना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में तीन-चार गांवों को मिलाकर एक मंडल बनाया गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में लगभग 10,000 की आबादी पर एक बस्ती बनाई गई है।
इसी संरचना के अनुसार, श्रीडूंगरगढ़ नगरीय क्षेत्र में कालूबास, बिग्गाबास, आड़सर बास, मोमासर बास और प्रताप बस्ती क्षेत्र में पथ संचलन आयोजित किए जाएंगे। श्रीडूंगरगढ़ खंड क्षेत्र में धनेरू, इन्दपालसर, धर्मास, रीडी, सेरूणा, दुलचासर, सूडसर, सांवतसर, जाखासर और बापेऊ मंडल में भी पथ संचलन होंगे।
मोमासर खंड के अंतर्गत तोलियासर, मोमासर, लिखमादेसर, आड़सर, रामसरा, पुंदलसर, हेमासर, गुसांईसर बड़ा, पूनरासर और उदरासर मंडलों में पथ संचलन का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सुरजनसर गांव में भी पथ संचलन होगा।
पथ संचलन की तैयारियों को लेकर स्वयंसेवकों की टोलियां बनाई गई हैं, जो गांवों और बस्तियों में संपर्क कर गणवेश (यूनिफॉर्म) पूर्ति का आग्रह कर रहे हैं। खंड संघचालक आशाराम पारीक ने बताया कि गणवेश पूर्ति के लिए इच्छुक नागरिक अपने निकटतम संघ कार्यकर्ता से संपर्क कर सकते हैं।
यह शताब्दी वर्ष संघ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, और श्रीडूंगरगढ़ में पथ संचलन का आयोजन इस उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। इन आयोजनों का उद्देश्य संघ के स्वयंसेवकों को एकजुट करना और समाज में संगठन के मूल्यों का प्रसार करना है।