श्रीडूंगरगढ़, 10 नवंबर 2025: जिंदगी की आपाधापी में, कभी-कभी मौत एक शांत दस्तक की तरह आती है। ऐसा ही कुछ श्रीडूंगरगढ़ में हुआ, जहाँ एक 35 वर्षीय युवक, कानाराम मेघवाल, सुबह अपनी नींद से कभी नहीं उठा।
कानाराम, जो कि नापासर के रहने वाले थे, श्रीडूंगरगढ़ के बाज़ार में एक सीट कवर की दुकान पर मुनीम का काम करते थे। बताया जाता है कि वे पिछले एक सप्ताह से अपने घर नापासर में थे और रविवार की शाम ही वापस श्रीडूंगरगढ़ लौटे थे।
जैसे ही रात की खामोशी ने शहर को अपनी आगोश में लिया, कानाराम भी गहरी नींद में सो गए। किसी को क्या पता था कि यह नींद उन्हें कभी वापस नहीं आने देगी। सुबह जब नंदलाल राजपूत ने उन्हें जगाने की कोशिश की, तो उन्हें एहसास हुआ कि कुछ ठीक नहीं है।
खबर फैलते ही शहर में मातम छा गया। पुलिस को सूचना दी गई और एसआई मोहनलाल मीणा और जवान राकेश कुमार तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। कानाराम के पार्थिव शरीर को उपजिला अस्पताल पहुंचाया गया।
प्राथमिक जांच में, पुलिस को संदेह है कि कानाराम की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई होगी। हालांकि, असली वजह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगी।
कानाराम के परिवार को इस दुखद खबर से अवगत करा दिया गया है। इस मुश्किल घड़ी में, उनके प्रियजनों के दर्द की कल्पना करना भी मुश्किल है।
हेड कांस्टेबल बलवीर काजला मामले की आगे की कार्रवाई करेंगे। श्रीडूंगरगढ़ में हर कोई इस अप्रत्याशित घटना से स्तब्ध है। एक हंसता-खेलता युवक, जो कल तक सबके साथ था, आज हमेशा के लिए खामोश हो गया। जीवन की अनिश्चितता एक बार फिर सबके सामने आ खड़ी हुई है।