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मंच पर हुई अनेक प्रस्तुतियां, विजेताओं को मिले पुरस्कार, सहयोगियों व अतिथियों का किया सम्मान  |  भक्तिमय भागवत आयोजन प्रारंभ, निकाली कलश यात्रा, कथा वाचिका ने संकल्प के साथ सत्कर्म करने की दी प्रेरणा।  |  श्रीडूंगरगढ़ मंडी से देखें सभी जिंसो के “आज के भाव”  |  नजर आया चांद, कल होगी ईद, मुस्लिम समुदाय में उल्लास का माहौल  |  जेपीएस के बच्चों ने मेला घुमकर लिया झूलों का आनंद, मेले में बढ़ रही है रौनक  | 

राजस्थानी जन-जागरण के लिए ‘उजास समारोह’ आयोजित

श्रीडूंगरगढ़, 17 नवंबर, 2025। मरुभूमि की सांस्कृतिक पहचान को संजोने के उद्देश्य से श्रीडूंगरगढ़ में एक अनूठा आयोजन हुआ। मरुभूमि शोध संस्थान ने राजस्थली के बैनर तले “उजास” नामक समारोह आयोजित किया, जिसमें साहित्य और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

समारोह का मुख्य आकर्षण विमला नागला की राजस्थानी बालकथा कृति ‘बातां री मुळक’ पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता रही। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति प्रेम का परिचय दिया। संस्कृति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य अतिथि, बीईईओ सरोज पूनिया वीर ने राजस्थानी भाषा को सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन को सामाजिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा से दूर होने पर समाज को बौद्धिक विकास में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

समारोह के संयोजक, साहित्यकार रवि पुरोहित ने राजस्थानी भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई। उन्होंने नई शिक्षा नीति के अनुसार प्राथमिक शिक्षा का माध्यम राजस्थानी किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

राजस्थली के संपादक और साहित्यकार श्याम महर्षि ने राजस्थानी को राजस्थान की अस्मिता बताया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अपनी भाषा को उसका हक दिलाया जाए, अन्यथा आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार छगनलाल सेवदा ने इस तरह की प्रतियोगिताओं को भाषाई विकास के लिए नवाचारपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि पेड़ों को सींचने से पहले जड़ों को मजबूत करना जरूरी है।

समारोह की शुरुआत में सहयोगी संस्था बागेश्वरी साहित्य, कला एवं सांस्कृतिक विरासत संस्थान के अध्यक्ष शकूर बिकाणवी ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। कवयित्री भगवती पारीक ‘मनु’ ने मंच का कुशल संचालन किया।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। परमेश्वरनाथ पुत्री सरस्वती सिद्ध, लिखमादेसर ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया, जबकि आईना शर्मा पुत्री तोलाराम, सातलेरां द्वितीय और प्रिया पारीक पुत्री अशोक कुमार, लिखमादेसर तृतीय स्थान पर रहीं। भावना (लिखमादेसर), गजानंद (कल्याणसर पुराना), बल्ली (कोजाराम), तनु मेघवाल (बिग्गा), और नितेश जोशी (श्रीडूंगरगढ़) को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विजेताओं को उपरणा, ट्रॉफी, मेडल और पुस्तकों का सेट प्रदान किया गया। निर्णायक मंडल में साहित्यकार सत्यदीप, श्रीभगवान सैनी और पूनमचंद गोदारा शामिल थे।

कार्यक्रम में लक्ष्मीकांत वर्मा, हजारी बाना, सीमा भोजक, छैलू चारण, रेणु प्रजापत, विनिता सारस्वत, मीना, और सीमा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। हुमेरा खान सिसोदिया, मेहरीन सिसोदिया, लोकगीत नृत्य, और दिव्यांशी सुथार (गायन व वादन) द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। लर्न एंड फन, बींझासर, गुसाईंसर बड़ा, वार्ड 11, श्रीडूंगरगढ़ में प्रभात फेरी भी निकाली गई।

प्रतियोगिता में पीएम श्री ताल मैदान, महात्मा गांधी विद्यालय (हनुमान धोरा), भारती निकेतन, लर्न एंड फन, एजी मिशन, बाल भारती, रा.उ.मा. विद्यालय (बिग्गा, लिखमादेसर, बींजासर, गुसांईसर बड़ा, कल्याणसर पुराना, सेरूणा, जैसलसर, सातलेरा, अभयसिंहपुरा), एमजी उच्च प्राथमिक विद्यालय वार्ड 11, ब्राइट फ्यूचर सीनियर सेकेंडरी स्कूल श्रीडूंगरगढ़ सहित अनेक विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए एक ज्ञानवर्धक अनुभव था, बल्कि इसने राजस्थानी भाषा और संस्कृति के प्रति प्रेम और सम्मान को भी बढ़ावा दिया।

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