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मोटिवेशनल सेमिनार में शामिल हुए क्षेत्र के प्रतिभावान युवा सचिन, विद्यार्थियों को दी स्वाध्याय और एकाग्रता की दी सीख।

3 अक्टूबर, 2025। श्रीडूंगरगढ़ से एक प्रेरक कहानी सामने आई है। तोलियासर गांव के 22 वर्षीय सचिन राजपुरोहित, जिन्होंने कम उम्र में ही तीन सरकारी नौकरियों में सफलता हासिल की है, शुक्रवार को भारती कोचिंग एंड डिफेंस एकेडमी में आयोजित एक प्रेरणादायक सेमिनार में शामिल हुए।

सेमिनार में सचिन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्वाध्याय (self-study) और एकाग्रता के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों की चकाचौंध और दिखावे से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है अपने भीतर की शांति और निरंतर अभ्यास की शक्ति को पहचानना।

सचिन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को यह भी समझाया कि परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों की संख्या पर ध्यान देने के बजाय, अपनी तैयारी को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनका मानना है कि सफलता उसी को मिलती है जो लगन, अनुशासन और धैर्य के साथ मेहनत करता है।

भारती कोचिंग एंड डिफेंस एकेडमी में आयोजित इस कार्यक्रम में एकेडमी के संचालक केआर फौजी और राज सर ने सचिन का साफा पहनाकर अभिनंदन किया। राज सर ने विद्यार्थियों को सचिन के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि वे वर्तमान में पुणे में ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि सचिन ने सीमित संसाधनों के बावजूद अटूट मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है।

विद्यालय की शिक्षिका सीमा भोजक ने विद्यार्थियों को व्यवस्थित टाइम टेबल का महत्व समझाया और टाइम टेबल बनाकर उसका दृढ़ता से पालन करने की बात कही। कोचिंग के संचालक केआर फौजी ने सचिन के संघर्ष और अनुशासन से प्रेरणा लेकर जीवन में सफलता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारती कोचिंग एंड डिफेंस एकेडमी विद्यार्थियों के लिए बेहतरीन कोचिंग के साथ-साथ हॉस्टल की सुविधा भी प्रदान करती है, जहाँ विशेषज्ञ शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थी अनुशासन के साथ निरंतर अध्ययन कर सफलता के प्रयास करते हैं।

सचिन राजपुरोहित की कहानी उन युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है जो अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी सफलता यह दिखाती है कि सही दिशा में मेहनत और दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।

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