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मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में सारस्वत ग्लोबल एक्सपो का भव्य शुभारंभ

विधायक ताराचंद सारस्वत बोले- यह केवल आयोजन नहीं, सनातन मूल्यों को सशक्त करने का मंच

डूंगरगढ़ one 21 दिसम्बर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सारस्वत ब्राह्मण सम्मेलन के अंतर्गत सारस्वत ग्लोबल एक्सपो का भव्य उद्घाटन किया गया। उद्घाटन श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत ने किया। इस मौके पर काशी पीठ के पीठाधीश्वर सम्यमिन्द्र तीर्थ स्वामी, राज्य के कानून मंत्री जोगाराम पटेल, चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी, ले. जनरल जी.डी. बक्शी, घनश्याम ओझा और हस्तीमल सारस्वत सहित देश-विदेश से आए समाज के प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

वैश्विक मंच दे रहा है सारस्वत समाज की प्रतिभाओं को पहचान
विधायक ताराचंद सारस्वत ने कहा कि सारस्वत ग्लोबल एक्सपो समाज के उदीयमान और प्रतिभावान लोगों को व्यवसाय, नवाचार और उद्यमिता के लिए वैश्विक मंच उपलब्ध करा रहा है। यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार, शिक्षा, सेवा और संगठन को मजबूत करने की ऐतिहासिक पहल है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य विश्वभर में फैले सारस्वत ब्राह्मण समाज को एक मंच पर लाकर सनातन संस्कृति और शाश्वत मूल्यों के संरक्षण व संवर्धन के लिए संवाद स्थापित करना है।

शिक्षा, शोध और युवा सशक्तिकरण पर विशेष सत्र
सम्मेलन के दौरान सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं पर विचार गोष्ठियां, शिक्षा, शोध और युवा सशक्तिकरण पर विशेष सत्र योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली पर आधारित प्रदर्शनी समाज में एकता, संगठन और सेवा भावना पर मंथन जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
देश-विदेश से आए विद्वानों, संत-महात्माओं और समाजसेवियों की सहभागिता आयोजन की खास पहचान रही।

एक्सपो में दिखी संस्कृति, कला और नवाचार की झलक
सारस्वत ग्लोबल एक्सपो में धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थानों के स्टॉल, पारंपरिक कला, साहित्य और वैदिक ग्रंथों की प्रदर्शनी, समाजोत्थान से जुड़े नवाचार और योजनाएं, युवा प्रतिभाओं के लिए विशेष मंच आकर्षण का केंद्र रहे।

सरस्वती नदी से जुड़ी है समाज की पहचान
वक्ताओं ने बताया कि सारस्वत समाज की जड़ें पवित्र सरस्वती नदी से जुड़ी हैं। वैदिक काल में सरस्वती नदी के तट पर निवास करने वाले ब्राह्मण सारस्वत कहलाए। नदी के लुप्त होने के बाद समाज राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, कश्मीर, हिमाचल और तटीय क्षेत्रों में फैल गया, जहां उसने ज्ञान और संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाया।
प्रशासन से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक योगदान
सम्मेलन में बताया गया कि सारस्वत समाज ने वेद, उपनिषद, दर्शन, गणित, ज्योतिष और आयुर्वेद सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रशासन, न्यायपालिका, राजनीति, स्वतंत्रता आंदोलन, साहित्य, योग और आयुर्वेद में समाज की भूमिका अहम रही है।
राष्ट्रनिर्माण में सहभागिता का आह्वान
अंत में विधायक ताराचंद सारस्वत ने कहा कि सारस्वत समाज केवल एक जातीय पहचान नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, सेवा और राष्ट्रसमर्पण की जीवंत परंपरा है। युवाओं को सही दिशा देकर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया।
आयोजन की सफलता पर सभी आयोजकों को बधाई दी गई।

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