शुक्रवार को आड़सर बास में रहने वाली 83 वर्षीय शुभीदेवी तातेड़ का निधन हो गया। उनके परिवार ने एक अनुकरणीय फैसला लेते हुए शुभीदेवी के नेत्रदान का संकल्प लिया। परिवार की इस इच्छा को आई बैंक, प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर के माध्यम से पूरा किया गया।
शुभीदेवी के परिवार – राजकुमार-सरितादेवी, मनोज कुमार-रेखादेवी, राकेश कुमार-बबीतादेवी और दीपक कुमार-मधुदेवी – का मानना है कि यह नेत्रदान मानव सेवा में शुभीदेवी का अंतिम योगदान है। उनका कहना है कि नेत्रदान के ज़रिये उनकी माताजी दूसरों के जीवन में रोशनी बनकर हमेशा जीवित रहेंगी।
परिवार को यह प्रेरणा तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष विक्रम मालू और सहमंत्री सुमित बरड़िया से मिली। संगठन के सक्रिय सदस्य अशोक झाबक के संयोजन में नेत्रदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई।
तेयुप के राज्य प्रभारी रोशन नाहर ने शुभीदेवी के नेत्रों से दो लोगों के जीवन में उजाला होने की संभावना पर खुशी जताई। उन्होंने इसे मानवता की सच्ची सेवा बताया और तेयुप की स्थानीय टीम तथा तातेड़ परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर रतनलाल गंग, मालाराम तातेड़, दीपांशु तातेड़, और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के इस नेक कार्य की सराहना की।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं है, बल्कि दूसरों के लिए जीने का एक नया अवसर भी हो सकता है। नेत्रदान जैसे कार्यों से हम न सिर्फ किसी को रोशनी दे सकते हैं, बल्कि अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए अमर भी बना सकते हैं।