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भीखमचन्द पुगलिया की माँ ने स्वीकारा संथारा, आचार्यों की रही है विशेष कृपा

डूंगरगढ़ one 1 जनवरी, 2026 श्रीडूंगरगढ़। राजस्थान गौरव भामाशाह भीखमचन्द पुगलिया की 90 वर्षीया माता ने उच्च भावों के साथ संथारा स्वीकार किया है।
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा की अध्यक्ष सुशीला पुगलिया ने बताया कि उनकी सास श्रद्धा की प्रतिमूर्ति किरण देवी पुगलिया धर्मपत्नी स्व. धर्मचंद्र पुगलिया (श्रीडूंगरगढ़ – कोलकाता) को आचार्य महाश्रमण की अनुमति से उपासक जुगराज बैद ने कोलकाता में आज सुबह 6:15 बजे तिविहार संथारे का प्रत्याख्यान करवाया। संथारा उच्च भावों से गतिमान है।

संथारा साधिका श्रद्धा की प्रतिमूर्ति किरण देवी कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थी। उन्होंने जागरूकता के साथ संथारा स्वीकार करने की जिज्ञासा रखी। आज सुबह 3:05 बजे भीखमचन्द पुगलिया और सुशीला पुगलिया ने उन्हें त्याग करवा दिया था तत्पश्चात भावों का ऊर्ध्वारोहण देखते हुए आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से संथारे का प्रत्याख्यान करवाया।

गौरतलब है कि संथारा साधिका किरण देवी पुगलिया पर तीन आचार्यों का वरदहस्त रहा है। उन्होंने सदैव अपने जीवन में त्याग, तपस्या और साधु- साध्वियों की सेवा को महत्त्व दिया। उनका जीवन अध्यात्म से ओत प्रोत रहा है और अब जीवन के अंतिम समय में संथारा स्वीकार करके जीवन में अध्यात्म की उत्कृष्टता का परिचय दिया है।

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