रविवार को भवन परिसर में समाज की कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य लोकार्पण समारोह की तैयारियों को अंतिम रूप देना था। समाज के गणमान्य सदस्यों ने एक साथ बैठकर कार्यक्रम की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष, लक्ष्मीनारायण तावणियाँ ने जानकारी देते हुए बताया कि 24 अक्टूबर को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ इस नवनिर्मित भवन का विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। यह पल न केवल भवन के निर्माण की सफलता का प्रतीक होगा, बल्कि समाज की एकता और शक्ति का भी परिचायक बनेगा।
सारस्वत समाज के अध्यक्ष, बजरंग लाल ओझा ने इस अवसर पर कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर सम्पूर्ण सारस्वत समाज को सादर आमंत्रित किया गया है। उन्होंने सभी समाजजनों से अपील की कि वे अपनी इस अमूल्य धरोहर के लोकार्पण समारोह में शामिल होकर इसे यादगार बनाएं।
समिति सदस्य कानाराम सारस्वत ने बताया कि उद्घाटन समारोह में उन सभी भामाशाहों का सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने भवन निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। उनका यह सहयोग समाज के लिए प्रेरणादायक है।
समिति के एक अन्य सदस्य, सांवरमल सारस्वत ने कहा कि इस उद्घाटन समारोह के साक्षी सम्पूर्ण कुंडिया सारस्वत समाज और क्षेत्र के प्रबुद्धजन होंगे। यह समारोह समाज को एक सूत्र में बांधने और भविष्य के लिए नई दिशा देने का कार्य करेगा।
बैठक में रेवंतराम सारस्वा (गुसाईंसर बड़ा), काशीराम तावणियाँ (रिड़ी), तुलसीराम सारस्वत, मेघराज ओझा, शंकरलाल सारस्वा (सेरूणा), हरिराम तावणियाँ, जयदयाल सारस्वत और राजेश शर्मा सहित समाज और समिति के कई सदस्यों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
‘सारस्वत सदन’ का निर्माण सारस्वत समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल समाज के सदस्यों को एक साथ आने और सामाजिक कार्यों को करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत होगा। यह भवन समाज की एकता, संस्कृति और प्रगति का प्रतीक बनेगा।