श्रीडूंगरगढ़, 26 अगस्त, 2025। सोमवार को श्रीडूंगरगढ़ अंचल में मेघ बरसे तो किसानों के मुरझाए चेहरे खिल उठे। सूखे की मार झेल रहे खेतों में हरियाली की उम्मीद जगी। मानो प्रकृति ने अपनी कृपा बरसा दी हो। पर नियति को शायद कुछ और ही मंज़ूर था। इसी बारिश ने लखासर गाँव में एक परिवार पर विपदा का पहाड़ तोड़ दिया।
लखासर में रामचंद्र नायक का कच्चा घर तेज बारिश की भेंट चढ़ गया। गाँव के सरपंच प्रतिनिधि गोवर्धन खिलेरी ने बताया कि सुबह जब आसमान से पानी बरस रहा था, रामचंद्र अपने खेत पर काम कर रहे थे। तभी यह दुखद घटना घटी। अगर वे घर में होते, तो अनहोनी हो सकती थी। अब उनके परिवार का आशियाना मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है और गृहस्थी का सारा सामान मिट्टी में मिल गया है।
गोवर्धन खिलेरी ने बताया कि रामचंद्र का परिवार गरीब है और अब उनके सिर पर छत नहीं है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता प्रदान की जाए और उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे फिर से अपना जीवन शुरू कर सकें।
विपदा की खबर सुनते ही गाँव वाले मदद के लिए दौड़े आए। सबने मिलकर मलबे को हटाने में हाथ बंटाया और फिलहाल परिवार के रहने का अस्थायी इंतज़ाम किया है। यह घटना दिखाती है कि मुश्किल समय में इंसानियत ही सबसे बड़ा सहारा होती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस परिवार को कब तक सहारा देता है और कब तक यह परिवार अपने पैरों पर खड़ा हो पाता है।