ग्रामीणों के अनुसार, मकान काफी पुराना और जर्जर हालत में था। रविवार की बारिश के बाद सोमवार को गर्मी लगने से मकान ढह गया। हालांकि, एक बड़ी राहत की बात यह रही कि हादसे के समय रामचंद्र अपने परिवार के साथ खेत में थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
रामचंद्र का परिवार गांव में अकेला था और उनका यही एकमात्र आसरा था। घर गिरने से परिवार मायूस हो गया है।
घटना की सूचना मिलते ही गांव के प्रशासक और सरपंच प्रतिनिधि गोवर्धन खिलेरी सहित कई ग्रामीण मौके पर पहुंचे। खिलेरी ने प्रशासन से इस जरूरतमंद परिवार की मदद करने की मांग की है। ग्रामीणों ने पटवारी को भी घटना की जानकारी दी है और परिवार को सहायता प्रदान करने का आग्रह किया है।
बारिश के बाद जर्जर मकानों का गिरना एक गंभीर समस्या है, जो बेघर होने की कगार पर खड़े परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में प्रशासन और समाज का सहयोग ही इन परिवारों को इस मुश्किल दौर से निकालने में मददगार साबित हो सकता है।