यह समस्या, जो गाड़ियों की संख्या में वृद्धि के साथ लगातार बढ़ रही है, श्रीडूंगरगढ़ के निवासियों के लिए एक चिरस्थायी सिरदर्द बन गई है। लोग प्रतिदिन कई बार लगने वाले इस जाम से त्रस्त हैं और ओवरब्रिज के निर्माण की मांग लगातार ज़ोर पकड़ रही है। यह मांग यूं ही नहीं है, मार्च 2023 में रेलवे के सर्वे ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि प्रतिदिन यहां से एक लाख तीन हजार 742 वाहन गुजरते हैं।
यह कोई नई बात नहीं है। हाल के दिनों में भी इस फाटक पर जाम की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। 29 अक्टूबर को रात 11 बजे फाटक करीब डेढ़ घंटे बंद रहा, जिससे आक्रोशित लोगों ने सरकार से ओवरब्रिज निर्माण की गुहार लगाई। 31 अक्टूबर को दोपहर सवा तीन बजे और फिर उसी रात सवा छह बजे फाटक बंद होने से लंबा जाम लगा, और लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। 3 नवंबर को भी रात सवा 12 बजे बंद फाटक ने लोगों को खूब परेशान किया।
फाटक पार के श्रीडूंगरगढ़ के सभी गांवों के लोग इस समस्या से समान रूप से पीड़ित हैं। सालासर, सुजानगढ़ और बीदासर आने-जाने वाले यात्री भी इस जाम में फंसकर रह जाते हैं। लूणकरणसर और कालू से लेकर श्रीगंगानगर और हरियाणा से सालासर आने वाले श्रद्धालु भी इस पीड़ा से अछूते नहीं हैं। मूंगफली के सीजन में झाल वाले और हर मौसम में भारी वाहन चालकों को भी इस जाम से दो-चार होना पड़ता है। हजारों लोग प्रतिदिन इस कष्ट को झेलने के लिए मजबूर हैं।
लोग अब जाम की तस्वीरें भेजकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं और ओवरब्रिज निर्माण की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
श्रीडूंगरगढ़ रेलवे स्टेशन पर 36 गाड़ियों का स्टोपेज है, जिनमें कुछ साप्ताहिक हैं तो कुछ सप्ताह में दो या तीन दिन चलने वाली गाड़ियां भी शामिल हैं। इन गाड़ियों के गुजरने के दौरान फाटक लगभग 8-10 मिनट के लिए बंद रहता है। इन 18 जोड़ी गाड़ियों की सुविधा मिलने से क्षेत्र के निवासियों को रेल यात्रा में अवश्य ही सुविधा मिली है, और इससे लोग संतुष्ट भी हैं। लेकिन, ओवरब्रिज की मांग लगातार बनी हुई है।
कुछ नाराज ग्रामीण युवाओं ने इसे राजनीतिक और प्रशासनिक नाकामी का जाम बताते हुए “डबल इंजन” सरकार से क्षेत्र को लाभ पहुंचाने की बात कही है।
बीदासर रोड पर बने इस रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज की मांग को लेकर लोगों ने 47 दिनों तक धरना दिया और 34 दिनों तक अनशन किया। 9 मार्च 2023 को रेलवे प्रशासन की टीम और संघर्ष समिति के धरनार्थियों के बीच वार्ता हुई थी। उत्तर पश्चिम रेलवे, बीकानेर ने ओवरब्रिज के लिए सहमति पत्र भी जारी किया था। तत्कालीन रेल अधिकारी एक्सईएन सुनिल गहलोत और एईएन रमाकांत त्रिवेदी ने राज्य सरकार से इसे प्राथमिकता देकर निर्माण कार्य शुरू करने की सिफारिश भी की थी।
गौरतलब है कि यहां 7 मीटर चौड़ा और 800 मीटर लंबा ओवरब्रिज 45 करोड़ की लागत से बनाए जाने की स्वीकृति मांगी गई थी। लेकिन, उसके बाद आज तक यह जनहित का प्रोजेक्ट एक ज्वलंत समस्या बनकर अनदेखा ही पड़ा है।