श्रीडूंगरगढ़, 8 अक्टूबर 2025। न्याय की तलाश में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। मारपीट के एक पुराने मामले में अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट को तामील करते हुए पुलिस ने एक भगोड़े को गिरफ्तार कर लिया है।
यह कहानी शुरू होती है जब पुलिस को जानकारी मिली कि बाबूलाल नामक एक व्यक्ति, जिसके खिलाफ अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था, कानून से बच रहा है। पुलिस दल, जिसमें कांस्टेबल पुनीत कुमार, चंद्रपाल और अभिषेक शामिल थे, उसे पकड़ने के लिए कृतसंकल्प था।
सूत्रों की मानें तो, पुलिस टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए कई गांवों की खाक छानी। सबसे पहले वे गुसाईंसर बड़ा गांव पहुंचे, लेकिन आरोपी वहां नहीं मिला। इसके बाद पुलिस लोडेरा और डेलवां गांव गई और संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी।
अंततः, मुखबिर से मिली एक गुप्त सूचना ने पुलिस को सही दिशा दिखाई। उन्हें बताया गया कि बाबूलाल अपने ही गांव गुसाईंसर बड़ा में, गुवाड़ के पास एक गली में बैठा है।
पुलिस दल तुरंत हरकत में आया और बताए गए स्थान पर पहुंचा। जैसे ही बाबूलाल ने पुलिस को देखा, उसने भागने की कोशिश की। लेकिन इस बार वह सफल नहीं हो सका। मुस्तैद पुलिस टीम ने पीछा करके उसे धर दबोचा।
गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान 25 वर्षीय बाबूलाल पुत्र लिछमणराम जाट के रूप में हुई है। बाबूलाल को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन, बुधवार को, उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
यह घटना न्याय की धीमी, लेकिन अटूट गति का एक उदाहरण है। यह दिखाती है कि कानून से भागना अंततः व्यर्थ है, और न्याय की पकड़ से कोई बच नहीं सकता। यह घटना श्रीडूंगरगढ़ में चर्चा का विषय बनी हुई है, और इसने कानून के प्रति लोगों के विश्वास को और मजबूत किया है।